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वाराणसी

मरीजों को नहीं भा रहा अस्पताल का भोजन, काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद पर बढ़ी निर्भरता

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वाराणसी। पंडित दीनदयाल अस्पताल में मरीजों के लिए संचालित किचन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में जिस किचन में भोजन तैयार किया जा रहा है, वह बिना वैध लाइसेंस के संचालित होने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, जिस वेंडर को किचन संचालन की अनुमति दी गई थी, उसका एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) लाइसेंस पिछले वर्ष सितंबर में ही समाप्त हो चुका है।

बताया गया कि किचन के लिए खाद्य सुरक्षा लाइसेंस एफएसएसएआई की ओर से 21 जुलाई 2022 को जारी किया गया था, जिसकी वैधता 24 सितंबर 2025 तक थी। लाइसेंस समाप्त होने के बावजूद अस्पताल में भोजन तैयार करने का कार्य जारी है।

अस्पताल के किचन की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यहां प्रतिदिन करीब 175 लोगों के लिए भोजन तैयार किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन मरीज और तीमारदार भोजन की गुणवत्ता से संतुष्ट नजर नहीं आते हैं। कई मरीजों का कहना है कि अस्पताल का भोजन स्वाद और गुणवत्ता दोनों में कमजोर है।

मरीजों और तीमारदारों के अनुसार, दोपहर के समय काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से भोजन लेकर एक गाड़ी अस्पताल पहुंचती है। भोजन की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण मरीजों के परिजन और अस्पताल कर्मचारी भी पैकेट लेने के लिए कतार में लग जाते हैं।

जानकारी के अनुसार, किचन संचालन का ठेका जौनपुर की प्रवर इंटरनेशनल संस्था को दिया गया था। संस्था के प्रोपराइटर शिव नारायण पाठक बताए जा रहे हैं। वहीं किचन में कार्यरत कर्मचारियों का कहना है कि संचालन की निगरानी के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से मौजूद नहीं रहता और कर्मचारी अपने स्तर पर ही भोजन तैयार करते हैं।

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अस्पताल में भर्ती मरीज रत्नेश सिंह ने बताया कि वह 25 दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं और यहां का भोजन उन्हें पसंद नहीं आता। इसी वजह से वह काशी विश्वनाथ मंदिर से आने वाला भोजन ग्रहण करते हैं। वहीं संगीता देवी ने भी भोजन व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि भोजन समय से तो मिलता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं होती।

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