वाराणसी
पेपरलेस एनिमल ट्रैकिंग सेंटर में शुरू हुआ कुत्तों का बंध्याकरण अभियान
वाराणसी। शहर में लंबे समय से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, काटने की घटनाएं और रेबीज का खतरा बड़ी समस्या बना हुआ है। अब नगर निगम और टेको (द एनिमल केयर ऑर्गनाइजेशन-वेदांता ग्रुप) ने मिलकर इस चुनौती से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित अभियान शुरू किया है। ऐढ़े के एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में शहर के आवारा कुत्तों और बिल्लियों की माइक्रो चिपिंग, बंध्याकरण और डिजिटल रिकॉर्डिंग का कार्य शुरू हो गया है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ऐढ़े का यह सेंटर प्रदेश का पहला पूर्ण पेपरलेस एनिमल ट्रैकिंग एवं निगरानी केंद्र बन गया है।
नगर निगम के निर्देश पर निश्चित क्षेत्रों से केयर टीम कुत्तों को पकड़कर केंद्र तक लाती है। यहां उन्हें तीन से चार घंटे निगरानी में रखा जाता है। इसके बाद ब्लड सैंपल लेकर सीबीसी (कम्प्लीट ब्लड काउंट) जांच की जाती है, जिससे संक्रमण, खून की कमी और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों का पता चलता है। साथ ही एलएफटी और केएफटी जांच से लीवर और किडनी की स्थिति भी देखी जाती है। रिपोर्ट सामान्य आने पर विशेषज्ञ डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर में बंध्याकरण सर्जरी करते हैं।
सर्जरी के दौरान कुत्तों की गर्दन के ऊपरी हिस्से में 2.12 गुणा 12 एमएम की मेड इन इंडिया माइक्रो चिप इंजेक्ट की जाती है, जिसे मुंबई से मंगाया जाता है। पहचान के लिए कान पर वी आकार का कट लगाया जाता है तथा गर्दन में पट्टी और नेट बेल्ट बांधी जाती है। ऑपरेशन के बाद कुत्तों को पांच दिन तक निगरानी में रखा जाता है और स्वस्थ होने पर उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है।
चिप को स्कैन करते ही एप पर कुत्ते का पूरा रिकॉर्ड सामने आ जाता है, जिसमें माइक्रो चिप नंबर, मोहल्ला, पंजीकरण संख्या, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर का नाम और टीकाकरण की जानकारी दर्ज रहती है।
अब तक 222 कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि 89 कुत्तों की सर्जरी और चिपिंग हो चुकी है। केंद्र का मासिक लक्ष्य 250 से 300 कुत्ते-बिल्ली का बंध्याकरण और चिपिंग करना है। – डॉ. हरिओम सिंह, वेटनरी सर्जन, एबीसी सेंटर, ऐढ़े।
हिमांशु नागपाल (नगर आयुक्त) ने बताया कि, ऐढ़े के एबीसी पर कुत्तों की सर्जरी का कार्य शुरू हो गया है। एक एप बनाया गया है। कुत्तों के गले में आरएफ आईडी लगाई जा रही है, जिससे उनकी ट्रैकिंग की जा सकेगी। केंद्र पर सर्जरी की क्षमता और बढ़ाई जाएगी।
