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वाराणसी

बनारस के जाने माने हिंदू अस्पताल के डॉ०अमिततिवारी से स्वास्थ दिवस पर खास बातचीत

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार
वाराणसी: कहावत तो सुनी होगी। “”अगर आपके पास बेहतर स्वास्थ्य है तो दुनिया की सारी दौलत आपके पास है। अगर आपका स्वास्थ्य ही ठीक नहीं होगा तो दुनिया की कोई भी दौलत आपके काम की नहीं है।”” लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने के लिए ही तो हर साल 7 ​अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे मनाया जाता है। आज ही के दिन सन् 1948 में ”World Health Organisation” की स्थापना हुई थी। इसके दो साल बाद से ही यानी 7 अप्रैल 1950 से वर्ल्ड हेल्थ डे के रूप में इस दिन को मनाने की शुरुआत की गई। ताकि लोग अपने स्वास्थ के प्रति अवेयर हो सकें।

डॉ०अमित जी कहते हैं इस बार है यह ​थीम

इस दिन को सेलिब्रेट करने के लिए ”#World_Health_Organisation” हर साल किसी न किसी थीम का आयोजन करता है। हर साल की तरह इस साल भी वर्ल्ड हेल्थ डे की थीम खास है। इस बार इसकी थीम है ”एवरीवनएवरीवेयरहेल्थफॉरऑल।” इसका मतलब हरव्यक्तिकोहरजगहहेल्थकेयर मिले। जिससे उसका स्वास्थ बेहतर हो सके। वह भी बिना किसी वित्तीय परेशानी के।

इसलिए मनाया जाता है यह दिन
7 ​अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे सेलिब्रेट करने का कारण यह है कि हमारे देश के लाखों करोड़ों लोग कई बीमारियों का शिकार है। जैसे किसी को टीवी, एनीमिया, एड्स, दंतमुखबीमारी व कैंसर, पोलियो, दिल, अल्जाइमर, डिप्रेशन, पैनिक अटैक, एंजायटी आदि। इन बीमारियों को कम करने के लिए, जड़ से खत्म करने और लोगों को इन बीमारियों के प्रति जागरुक करने के लिए इस दिन की शुरुआत की गई थी। ताकि लोग अपना बेहतर ख्याल रख सकें। अक्सर देखा गया है कि जिंदगी ​की व्यवस्था के चलते लोग अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख पाते, इसलिए जागरुकता के उद्देश्य के लिए विश्व स्वास्थ्य दिवस प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।

ऐसी है भारत में स्वास्थ्य स्थिति
स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार तीन वर्ष की अवस्था वाले 3.88 प्रतिशत बच्चों का विकास अपनी उम्र के हिसाब से नहीं हो सका है और 46 प्रतिशत बच्चे अपनी अवस्था की तुलना में कम वजन के हैं जबकि 79.2 प्रतिशत बच्चे एनीमिया रक्ताल्पता से पीडि़त हैं और हार्मोनल बदलाव की वजह से दांतो_मसूड़ों में गंभीर बीमारियां पनपने लगती हैं । गर्भवती महिलाओं में एनीमिया 50 से 58 प्रतिशत बढ़ा है। कहा जाता है कि बेहतर स्वास्थ्य से आयु बढ़ती है। इंडिया हेल्थ रिपोर्ट 2010 के मुताबिक सार्वजनिक स्वास्थ्य की सेवाएं अभी भी पूरी तरह से मुफ्त नहीं हैं और जो हैं उनकी हालत अच्छी नहीं है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की काफी कमी है। अस्पतालों में बिस्तर की उपलब्धता भी काफी कम है। केवल 28 प्रतिशत लोग ही बेहतर साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं।

आगे की बातचीत में डॉ०अमित जी फिट रहने का सुझाव देते हैं कि –
अपनी जिंदगी में छोटे छोटे बदलाव करके आप ​अपनी फिटनेस का ख्याल रख सकते हैं। जैसे आप हरी सब्जियों को सेवन करें, बाहर के खाने को अवाइड करें, भरपूर नींद लें, दांतमसूड़ों की साफ सफाई रखें व नियमित चेकअप कराएं , एक्सरसाइज करें, डाइट में चीनी और नमक की मात्रा कम करें। इन छोटी छोटी चीजों को ध्यान में रखकर आप अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख सकते हैं। आर्युवेद अपनाकर जीवनशैली को हमेशा के लिए स्वस्थ दुरुस्त रख सकते हैं, आयुर्वेद का मुख्य नियम है परहेज और ।ऐसे सभी जानकारियां के लिए अपने निकटतम आयुर्वेदिकचिकित्सक/सेंटर पर संपर्क करें ।

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