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वाराणसी

श्रीलक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन – नृसिंह मंदिर, मुमुक्षु भवन और धर्म संघ में जा संतों का किया अभिनंदन

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रिपोर्ट – प्रदीप कुमार

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वाराणसी में आयोजित श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद परम श्रीवैष्णव परिव्राजक संत श्रीलक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। स्वामी जी तथा उनके साथ गए संतों ने‌ दिव्य वैदिक मंत्रों से भगवान भूतनाथ की स्तुति अर्चना की। बाबा के प्रधान अर्चक श्रीकांत मिश्र ने पूज्य स्वामी जी और संतों का हार्दिक स्वागत अभिनंदन किया और प्रसाद दिया। वहां से पूज्य स्वामी जी प्रहलाद घाट स्थित नृसिंह भगवान मंदिर पहुंचे और प्रभु का दर्शन आराधन किया। मंदिर के महंत मुमुक्षु स्वामी नै पूज्य स्वामी तथा साथ चल रहे संतों का स्वागत अभिनंदन किया। स्वामी जी ने बटुकों को वस्त्र, मिष्ठान आदि प्रदान किया। वाराणसी के डीसीपी आर एस गौतम ने नृसिंह मंदिर में स्वामी जी का आशीर्वाद लिया। फिर मुमुक्षु भवन पहुंच कर उन्होंने दण्डी स्वामी श्रीमन्नारायण आश्रम, वहां विराजमान संतों एवं ब्रह्मचारियों को सम्मानित किया और उन्हें महायज्ञ का प्रसाद एवं अंगवस्त्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया। उपस्थित संत विद्वानों को संबोधित करते हुए स्वामी जी महाराज ने वेद, महर्षि वेदव्यास, आदिशंकराचार्य, स्वामी रामानुजाचार्य, रामकृष्ण स्वामी, यामुनाचार्य स्वामी आदि महान संतों के कथनों का उद्धरण देकर वैष्णव और शैव संप्रदायों के समान आधार और दर्शन की विवेचना करते हुए उनकी एकता को स्थापित किया और बताया कि दोनों संप्रदायों की गुरुपरंपरा एक हीं है। ध्येयो नारायण सदा, प्रेयो नारायण सदा, श्रेयो नारायण सदा आदि मंत्रों की व्याख्या कर उन्होंने भगवान नारायण की महिमा बतायी। उन्होंने भगवान शंकर द्वारा पार्वती को संबोधित कथन के उदाहरण द्वारा भगवान विष्णु की उपासना के महत्व को बताया। स्वामी जी ने कहा कि बौद्ध और कई नवीन संप्रदायों द्वारा सनातन वैदिक संस्कृति पर किए जा रहे आक्रमणों और उसे निर्बल एवं समाप्त करने के प्रयत्नों से आदि शंकराचार्य नै रक्षा की। उन्होंने अद्भुत पराक्रम कर सनातन धर्म और संस्कृति का पुनर्स्थापन किया। स्वामी रामानुजाचार्य ने आदिशंकराचार्य कै कार्य को आगे बढ़ाते हुए सनातन धर्म को विश्व भर में प्रचारित किया, धर्म को सबके लिए सहज सुलभ बनाया। आज इन महान वंदनीय संतों के कारण धर्म जीवित है। महान संत स्वामी करपात्री जी महाराज के धर्म संघ आश्रम पहुंचे स्वामी जी तथा संतों का धर्म संघ सचिव जगजीतन पांडेय जी ने स्वागत किया। पाण्डेय जी ने स्वामी द्वारा वाराणसी में आयोजित श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उनसे प्रतिवर्ष काशी पधारने और यज्ञ करने का अनुरोध किया। पूज्य स्वामी ने वहां उपस्थित संतों एवं बटुकों का अभिनंदन किया और उन्हें महायज्ञ का प्रसाद दिया। , पूज्य स्वामी जी के साथ उनके परमशिष्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य अयोध्यानाथ स्वामी, वैकुण्ठनाथ स्वामी, मुक्तिनाथ स्वामी, महायज्ञ समिति अध्यक्ष पंडित शिवपूजन चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष डा. पुण्डरीक शास्त्री, सचिव धीरेंद्र तिवारी, रंगनाथ ब्रह्मचारी, माधवाचार्य ब्रह्मचारी, श्रीकांत स्वामी, महंत श्याम नारायण स्वामी, महंत शिव बचन जी, संजय स्वामी, हरेराम ओझा , हीरा ओझा, वाचस्पति पाण्डे आदि संत उपस्थित थे।

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