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वाराणसी

रेलवे स्टेशन और अस्पताल बने लावारिस नवजातों के ठिकाने

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वाराणसी। काशी में नवजात बच्चों को लावारिस हालत में छोड़ने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। पिछले एक साल में रेलवे स्टेशन और अस्पतालों से ऐसे 9 मामले सामने आए हैं, जिनमें 7 नवजात बेटियां हैं। परिजन इन्हें छोड़कर लापता हो जाते हैं। सभी बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर रानी रामकुमारी वनिता विश्राम गृह में रखा गया है, जहाँ फिलहाल 16 बच्चे हैं—11 लड़कियां और 5 लड़के।

आश्रम के प्रभारी अरुण कुमार सिंह के अनुसार, सभी बच्चों का मेडिकल परीक्षण कर भर्ती किया जाता है। पहचान के लिए अखबारों में विज्ञापन दिए जाते हैं और परिजनों को 60 दिन का समय मिलता है। इस अवधि में दावा न करने पर बच्चों को लीगल फ्री कर दिया जाता है और उनकी जानकारी केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) पोर्टल पर अपलोड की जाती है। वर्ष 2019 से अब तक आश्रम से 48 बच्चों को गोद दिया गया है।

हाल ही में सामने आए मामलों में कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से तीन माह की बच्ची, मुगलसराय स्टेशन से चार माह का बच्चा और कबीरचौरा अस्पताल से समय से पहले जन्मी बच्ची को परिजन छोड़कर चले गए। चाइल्ड लाइन और अनाथालय में इन बच्चों की देखरेख की जा रही है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज मिश्रा ने बताया कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश पर बच्चों को अनाथालयों में रखा जाता है, जहाँ रहने, खाने-पीने और सभी सुविधाओं की पूरी व्यवस्था की जाती है।

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