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वाराणसी

महामना मालवीय मिशन ने कुलपति को सौंपा मांगपत्र, सेवाश्रम पर जोर

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वाराणसी। महामना मालवीय मिशन (बीएचयू इकाई) के पदाधिकारियों ने 2 मई 2026 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति को एक विस्तृत पत्र सौंपकर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के आदर्शों को आगे बढ़ाने और मिशन की गतिविधियों को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण मांगें रखीं। मिशन, जिसकी स्थापना 9 अप्रैल 1978 को बीएचयू के पूर्व छात्रों द्वारा की गई थी, देशभर में मूल्य-आधारित शिक्षा, सांस्कृतिक जागरण, राष्ट्रीय एकता और चरित्र निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

नई दिल्ली स्थित मालवीय स्मृति भवन इसका केंद्रीय केंद्र है, जहां शोध, अध्ययन और प्रकाशन की समृद्ध परंपरा विकसित की गई है। मिशन द्वारा “महामना वाङ्मय” के 23 खंड प्रकाशित किए जा चुके हैं और इसकी 30 शाखाएं देशभर में कार्यरत हैं, जिनमें बीएचयू इकाई प्रमुख मानी जाती है। कुलपति को सौंपे गए पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों में मूल्य-आधारित एवं चरित्र निर्माण से जुड़े विषयों को शामिल करने की मांग की गई।

इसमें मालवीय जी का जीवन और दर्शन, भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म, नैतिकता, आध्यात्मिकता, गुरुकुल परंपरा, वेद-उपनिषद और गीता के मानवीय मूल्यों को क्रेडिट-आधारित पाठ्यक्रम के रूप में सम्मिलित करने का प्रस्ताव रखा गया।मिशन ने केंद्रीय पुस्तकालय में “मालवीय गैलरी” को और सुदृढ़ करने, नई शोध सामग्री और पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा प्रख्यात वक्ताओं के नियमित व्याख्यान आयोजित करने का सुझाव भी दिया, ताकि छात्र और शोधार्थी महामना के विचारों को गहराई से समझ सकें।

विश्वविद्यालय परिसर में महिला महाविद्यालय और विश्वनाथ मंदिर चौराहे के पास 10×10 फीट के डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिन पर महामना के प्रेरक विचार और चित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। मिशन ने इस पहल में सहयोग देने की इच्छा भी जताई। इसके अलावा बीएचयू परिसर, विशेष रूप से मालवीय भवन में मिशन के लिए एक समर्पित कार्यालय स्थान आवंटित करने तथा बैठकों, संगोष्ठियों और अन्य कार्यक्रमों के आयोजन की अनुमति देने का अनुरोध किया गया, ताकि मिशन की गतिविधियों को संस्थागत मजबूती मिल सके।

मिशन ने वर्ष 2015 में प्रस्तुत प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए आईएमएस-बीएचयू आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों और उनके परिजनों के लिए सेवाश्रम निर्माण हेतु भूमि आवंटन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग दोहराई। इस प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद से सैद्धांतिक स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। मिशन ने निर्माण और उससे जुड़े सभी खर्च स्वयं वहन करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

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संभावित स्थानों में ट्रॉमा सेंटर परिसर और सुंदरपुर क्षेत्र की भूमि का सुझाव दिया गया।साथ ही कुलपति ने महामना के 23 खंडों के वाङ्मय का लोकार्पण काशी हिंदू विश्वविद्यालय में कराने पर सहमति भी प्रदान की। मिशन के पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि कुलपति इन प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय लेकर महामना के आदर्शों को साकार करने में सहयोग देंगे।

उनका कहना है कि इन पहलों से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि होगी और समाज के वंचित वर्गों को भी सीधा लाभ मिलेगा।बैठक में मिशन के अध्यक्ष प्रो. रमा शंकर दूबे, कार्यकारी अध्यक्ष विजय नाथ पाण्डेय, महामंत्री प्रो. शैलेन्द्र कुमार गुप्ता, संगठन मंत्री प्रमील पाण्डेय, सचिव डॉ. अनिल कुमार सिंह, प्रोफेसर जेपी लाल और प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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