चन्दौली
सकलडीहा पीजी कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
“मीडिया, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा” विषय पर हुआ विचार-विमर्श
सकलडीहा (चंदौली)। स्थानीय सकलडीहा पीजी कॉलेज में शनिवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह संगोष्ठी समाज विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली तथा रक्षा एवं सामरिक अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। संगोष्ठी का मुख्य विषय “मीडिया, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव” रहा, जिस पर देशभर से आए विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि जिला सत्र न्यायालय, वाराणसी के सीजीएम मनीष कुमार रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज, दीनदयाल नगर के प्राचार्य प्रोफेसर उदयन मिश्रा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सकलडीहा पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने की।
संगोष्ठी के संयोजक प्रोफेसर विजेंद्र सिंह (रक्षा अध्ययन विभाग) ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संदीप कुमार सिंह ने किया।
सीजीएम मनीष कुमार ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया आज समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बन चुका है। उन्होंने चेताया कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मीडिया के दुरुपयोग की संभावनाएं भी बढ़ी हैं, जो सामाजिक अस्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर सकती हैं। सोशल मीडिया के नकारात्मक पहलुओं में स्पष्ट सामग्री का प्रसार, गोपनीयता का उल्लंघन, चरमपंथी विचारों का प्रचार, अनुचित छवियों का साझा किया जाना, अश्लील भाषा, पारिवारिक संबंधों पर प्रभाव, ऑनलाइन ठगी, साइबर अपराध और आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हैं।
प्रो. उदयन मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया आधुनिक जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। यह संचार, नेटवर्किंग और सूचनाओं के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है, लेकिन इसका दुरुपयोग आंतरिक सुरक्षा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पांडेय ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के डिजिटल युग में अपार संभावनाएं हैं, परंतु इसके साथ साइबर अपराधों में भी वृद्धि हुई है। इस चुनौती से निपटने के लिए बौद्धिक समाज को सजग प्रहरी की भूमिका निभानी होगी।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. समीम राईन ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि डिजिटल युग में इंटरनेट का विवेकपूर्ण प्रयोग कर ज्ञान, विज्ञान, जन-जागरूकता, सुरक्षा, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों को मजबूती दी जा सकती है।
इस अवसर पर विभिन्न महाविद्यालयों एवं संस्थानों से आए शिक्षाविदों एवं बुद्धिजीवियों ने संगोष्ठी में भाग लिया। प्रमुख उपस्थिति में प्रो. पी.के. सिंह, प्रो. उदय शंकर झा, प्रो. डी.बी. सिंह, डॉ. जयप्रकाश यादव, डॉ. अमित, डॉ. इंद्रजीत सिंह, डॉ. डी.के. द्विवेदी, डॉ. वंदना, अजय यादव, डॉ. अनिल तिवारी, डॉ. श्यामलाल यादव, डॉ. जितेंद्र यादव, डॉ. सीता मिश्रा, डॉ. उमेश चतुर्वेदी, डॉ. गुप्ता, डॉ. संदीप जायसवाल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
दो दिवसीय यह राष्ट्रीय संगोष्ठी अपने उद्देश्य में सफल रही तथा मीडिया और राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंतन का एक सशक्त मंच बनकर उभरी। आयोजकों एवं प्रतिभागियों ने इस पहल को समाज हित में महत्वपूर्ण बताया।
