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वाराणसी

पीएम मोदी ने रखी दालमंडी प्रोजेक्ट की नींव

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वाराणसी का दालमंडी रीडिवेलपमेंट क्यों है पूरे पूर्वांचल के लिए खास ?

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी के ऐतिहासिक दालमंडी क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण पुनर्विकास परियोजना की आधारशिला रखी। यह प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के तीसरे रूट को चौड़ा और विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सरकार इसे वाराणसी की ‘मॉडल रोड’ के रूप में तैयार करने का दावा कर रही है, जिससे न केवल स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी नया जीवन मिलेगा।

दालमंडी प्रोजेक्ट का लाभ उन कारीगरों को मिलेगा जो लकड़ी के खिलौने, बनारसी साड़ी और अन्य पारंपरिक शिल्प में लगे हुए हैं। उनके बाजार को व्यवस्थित किया जाएगा और इस क्षेत्र में होम स्टे और छोटे रेस्तरां खोलने की योजना भी है। हालांकि, इस विकास के साथ विरोध की लहर भी तेज हो गई है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का आरोप है कि उन्हें बिना पूरी जानकारी और सहमति के हटाया जा रहा है।

दालमंडी का इतिहास काफी पुराना है और एक समय यहां की सड़कों की चौड़ाई 30-35 फीट तक थी, लेकिन अवैध कब्जों और अनियोजित निर्माणों के चलते ये गालियां अब इतनी संकरी हो गई हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। वरिष्ठ पत्रकार राजेश गुप्ता के अनुसार, यह तुष्टिकरण की राजनीति और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। वह मानते हैं कि इस परियोजना से न केवल यातायात सुधरेगा बल्कि मकान मालिकों को भी आर्थिक लाभ होगा, जैसा कि विश्वनाथ कॉरिडोर के समय हुआ था।

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BHU से रिटायर्ड डॉ. राम प्रसाद सिंह के अनुसार, यदि दालमंडी जैसी भीड़भाड़ वाली जगह का सही तरीके से चौड़ीकरण होता है, तो यह क्षेत्र व्यापारिक हब में बदल सकता है। सड़क के दोनों ओर नई दुकानें, होटल और गेस्ट हाउस खुलेंगे जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुविधा को बढ़ाएंगे। विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचने के वैकल्पिक रूट के रूप में यह मार्ग जल्द ही अत्यधिक उपयोग में आने लगेगा।

हालांकि, परियोजना के विरोध में स्थानीय लोगों का गुस्सा भी लगातार सामने आ रहा है। दुकानदारों और निवासियों को डर है कि उनकी दुकानें, घर और धार्मिक स्थल – जिनमें 6 मस्जिदें शामिल हैं – टूट सकती हैं। विरोध कर रहे लोगों में न केवल मुस्लिम समुदाय के लोग हैं, बल्कि कई हिंदू व्यापारी भी इस विकास को अपने अस्तित्व पर खतरा मानते हैं।

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