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वाराणसी

डिप्टी एसपी समेत पुलिस टीम पर जानलेवा हमले के आरोप में 25 आरोपी दोषमुक्त

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वाराणसी। अपहरण हुए युवक का पता नहीं चलने से नाराज लोगों द्वारा धरना-प्रदर्शन के दौरान पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने के मामले में 25 आरोपितों को कोर्ट से राहत मिल गई। अपर जिला जज (त्रयोदश) मनोज कुमार सिंह की अदालत ने इस मामले में मुनीब राजभर समेत 25 आरोपितों को साक्ष्य के आभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत में मुनीब राजभर की ओर से अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव व चंद्रबली पटेल ने पक्ष रखा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, लंका थाना क्षेत्र के चौकी प्रभारी नगवा तहसीलदार सिंह ने लंका थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि वह लंका थाना क्षेत्र के नगवां से एक युवक के अपहरण के मामले की विवेचना कर रहे थे। उसी दौरान मालूम हुआ कि उक्त अभियोग से सम्बन्धित अपहृत राजा साहनी का अभी तक पता न चल पाने की बात को लेकर कुछ लोग मदरवां के सामने 05 अक्टूबर 2010 को मुख्य मार्ग पर रोड जाम करके प्रदर्शन कर रहे है। जिससे आवागमन अवरूद्ध हो गया है। आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हो रही है। एम्बुलेंस की कई गाडियां फंसी हुई है। इस सूचना पर जब वह वहां पहुंचे और उच्चाधिकारियों को घटना की जानकारी दी।

जानकारी के बाद सीओ (डिप्टी एसपी) भेलूपुर, लंका थाना‌ प्रभारी भी पुलिस बल के साथ मायके पर पहुंचे तो देखा कि सड़क पर दोनों तरफ से काफी मात्रा में रोड पर वाहन बेतरतीब खड़े है तथा लोग आगे-पीछे गाड़ियों को किनारे एवं बीच में खड़ा किये है। एम्बुलेंस की गाड़ियां फंसी है और साइरन बजा रही है। इस पर पुलिस लोगों को हटाते-बढ़ाते आगे बढ़ा तो देखा कि करीब ढाई तीन सौ लोग बीचों बीच सड़क पर बांस बल्ली लगाकर आवागमन अवरूद्ध किये है। उन्हें समझाने का प्रयास किया तो वह लोग उग्र हो गए। साथ ही पुलिस टीम पर ईंट-पत्थर चलाने लगे। जिससे सीओ समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

इसी बीच हमलावरों ने दारोगा तहसीलदार सिंह को जान से मारने की नियत से उनके सिर पर लाठी से प्रहार किया। हालांकि सिर पर हेलमेट होने की वजह से वह बाल-बाल बच गए। इस मामले में पुलिस ने मुनीब चौहान समेत 25 लोगों को आरोपित बनाते हुए उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 147,149,427,353,332,336,307,504,506 व धारा 7 क्रिमिनल लॉ एमेन्डमेंट एक्ट व धारा 3/4 लोक सम्पत्ति के नुकसानी (निवारण) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

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