धर्म-कर्म
हिन्दी पंचांग का दसवां महीना पौष शुरू
पौष मास में सूर्य की विशेष पूजा के साथ ही नदी स्नान, दान-पुण्य और तीर्थ दर्शन करने की है परंपरा
पौष मास 27 दिसंबर से 25 जनवरी तक:
बुधवार, 27 दिसंबर से हिन्दी पंचांग का दसवां महीना पौष शुरू हो गया है। ये महीना 25 जनवरी तक रहेगा। पौष में सूर्य पूजा करने का महत्व सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में, प्रयागराज के संगम में स्नान करने की और पौराणिक तीर्थों में दर्शन-पूजन करने की परंपरा है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पौष मास धर्म-कर्म के नजरिए से बहुत खास है। इस महीने में ठंड पूरे प्रभाव में होती है, इस वजह से रोज सुबह कुछ देर सूर्य की रोशनी में बैठने से हमें विटामिन डी मिलता है, जोड़ों में दर्द से राहत मिलती है, त्वचा की चमक बनी रहती है, हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाव होता है। ऐसे कई स्वास्थ्य लाभ सूर्य की रोशनी में बैठने से मिलते हैं।
सूर्य देव से जुड़ी खास बातें
ज्योतिष में सूर्य को नौ ग्रहों के राजा माना गया है। सूर्य देव पंचदेवों में से हैं और एकमात्र प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले देवता हैं। किसी भी काम की शुरुआत पंचदेवों की पूजा के साथ ही होती है। सूर्य पूजा से कुंडली के नौ ग्रहों से जुड़े दोष शांत हो जाते हैं। कुंडली में सूर्य की स्थिति ठीक न हो तो दैनिक जीवन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहे, मान-सम्मान मिले, सफलता मिले, इसके लिए सूर्य की पूजा करनी चाहिए।
पौष मास में ऐसे करें दिन की शुरुआत
इस महीने में रोज सुबह जल्दी उठें। पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय सभी तीर्थों का और पवित्र नदियों का ध्यान करें।
स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरें। जल में कुमकुम, चावल और फूल डालें और सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम: का जप करना चाहिए। जल चढ़ाने के लिए घर के आंगन में ऐसी जगह चुनें, जहां से सूर्य देव के दर्शन आसानी से होते हैं। ध्यान रखें जल चढ़ाने के बाद जमीन पर गिरे जल पर किसी का पैर नहीं लगना चाहिए।
सूर्य को जल चढ़ाने के बाद घर के मंदिर में पूजा करें। गणेश पूजा के बाद बाल गोपाल का अभिषेक करें। श्रीकृष्ण को पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद जल से स्नान कराएं। वस्त्र और हार-फूल से श्रृंगार करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें। माखन-मिश्री, मिठाई का भोग तुलसी के साथ लगाएं। पूजा के बाद जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगें। इसके बाद प्रसाद बांटें और खुद भी लें।
इस महीने में ठंड ज्यादा रहती है, इसलिए जरूरतमंद लोगों को गर्म कपड़ों का दान करें। अनाज और धन का दान भी कर सकते हैं। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए दान-पुण्य करें।
