वाराणसी
सप्तमी पर कीजिए माता कालरात्रि के दर्शन, काशी में अन्नपूर्णा जी मन्दिर के पीछे(कालिका गली में) विराजमान हैं देवी का मन्दिर
रिपोर्ट – प्रदीप कुमार
वाराणसी: माता कालरात्रि को त्रिनेत्री भी कहा जाता है। माता के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल हैं। माता का यह स्वरूप कान्तिमय और अद्भुत दिखाई देता है।
माता कालरात्रि देवी काल का विनाश करने वाली देवी है।
मंदिर के महंत ने बताया कि माता कालरात्रि, काल का विनाश करती हैं, इसलिए इन्हे कालरात्रि कहा गया है। भोर से ही श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंच रहे हैं और दर्शन-पूजन कर रहे हैं।
नौ दुर्गा में श्रेष्ठ स्थान
मंदिर महंत परिवार के सदस्य राजीव ने बताया कि माता कालरात्रि का नौ दुर्गाओं में श्रेष्ठ स्थान है। सप्तमी के दिन श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर 2 के बगल में स्थित कालिका गली में इनका भव्य प्राचीन मंदिर हैं। इनके दर्शन मात्र से आदमी की सभी बाधाएं दूर हो जाती है और वह स्वास्थ्य जीवन व्यतीत करता है।
अकाल मृत्यु से बचातीं हैं मां
महंत ने बताया कि मां कालरात्रि अकाल मृत्यु से बचाती हैं। साथ ही जैसे डॉक्टर्स के विभाग होते हैं वैसे ही दुर्गा स्वरुप भी लोगों को स्वस्थ करती हैं। माता कालरात्रि को लिवर की देवी कहा गया। इनके नियमित दर्शन से माता लिवर सम्बन्धी, पेट से सम्बंधित बाधाएं दूर हो जाती हैं ।
कोर्ट -कचहरी से मिलती है मुक्ति
उन्होंने बताया कि माता हर तरह की बाधाएं दूर करने वाली मां हैं। इनके दर्शन से इंसान के जीवन में चल रहे मुकदमें और कोर्ट-कचहरी से उसे मुक्ति मिलती है। माता को नारियल और चुनरी चढ़ाकर भक्त आशीर्वाद ले रहे हैं।
