मिर्ज़ापुर
मंडलीय चिकित्सालय की व्यवस्था चरमराई, मरीज बेहाल
मिर्जापुर। प्राचार्य व्यवस्था सुधारने के बजाय कमरे के पुनर्निर्माण में व्यस्त, सरकारी धन का दुरुपयोगमिर्जापुर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने जिले के मंडलीय चिकित्सालय की स्थिति को दिन-ब-दिन बदतर बना दिया है। पूर्व प्राचार्य आर.वी. कमाल के स्थानांतरण के बाद अस्पताल की हालत लगातार बिगड़ रही है।
जहाँ उनके कार्यकाल में व्यवस्थाएँ पटरी पर आ रही थीं, वहीं नए प्राचार्य के आने के बाद हालात फिर से बेकाबू होते जा रहे हैं।मरीजों की सुविधा सुधारने की जगह नए प्राचार्य अपने कमरे के पुनर्निर्माण में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार, अब तक इस काम पर 30 से 40 लाख रुपये तक का सरकारी धन खर्च हो चुका है।
सवाल यह उठता है कि जब मेडिकल कॉलेज बने केवल 6 साल हुए हैं, तो कमरे के पुनर्निर्माण की इतनी बड़ी ज़रूरत कैसे पड़ गई?उधर, बहुचर्चित दवा दुकान के कब्जे का मुद्दा महीनों से उठ रहा है, लेकिन इस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि प्राचार्य अस्पताल की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय मीडिया और जनसमस्याओं से दूरी बनाए हुए हैं।
विश्वसनीय सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है कि जिम्मेदारी संभालने वाले कई अधिकारी समय पर अस्पताल में मौजूद नहीं रहते, बल्कि दोपहर बाद अपने निजी क्लीनिक का रुख कर लेते हैं। यही कारण है कि अस्पताल की व्यवस्था दलालों के हाथ में होती जा रही है और परेशान मरीज मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, चिकित्सालय के सीएमएस द्वारा सरकार से 9 हज़ार रुपये मकान भत्ता लेना भी गैरकानूनी बताया जा रहा है। यह साफ़ संकेत है कि जिले में तैनात उच्चाधिकारी केवल अपनी आय बढ़ाने में रुचि रखते हैं, मरीजों की समस्याओं से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
