वाराणसी
होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और होली की तिथियों को लेकर संशय दूर, पुजारी ने बताया शास्त्रसम्मत समय
वाराणसी। इस वर्ष होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और होली को लेकर श्रद्धालुओं के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचांगों के अनुसार इस बार होलिका दहन मध्यरात्रि के बाद करना अधिक शुभ रहेगा। कुछ शास्त्रों में रात्रि 12 बजकर 47 मिनट से दहन का समय बताया गया है, लेकिन उत्तम पूर्णकाल को ध्यान में रखते हुए रात्रि 1:00 बजे से 1:15 बजे तक का समय विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त रात्रि 2:20 बजे तक भी श्रद्धालु विधि-विधान से होलिका दहन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भद्रा और शुभ मुहूर्त का विचार कर दहन करना ही शास्त्र सम्मत है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
पुजारी पंकज मिश्रा ने आगे बताया कि 3 मार्च, मंगलवार को इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से प्रारंभ होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। चंद्र ग्रहण का सूतक काल नौ घंटे पूर्व से मान्य होता है, इसलिए सुबह 6:20 बजे से ही सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखे जाएंगे और पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी।
इस अवधि में श्रद्धालुओं को जप, तप, ध्यान और मंत्र जाप करना चाहिए। भोजन पकाना, सब्जी काटना, सिलाई-बुनाई या अन्य शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। घर में पहले से रखे भोजन में तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए, ताकि उसकी पवित्रता बनी रहे। ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से स्नान कर भगवान का स्मरण करते हुए पूरे घर की शुद्धि करनी चाहिए तथा दान-पुण्य करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
उन्होंने बताया कि ग्रहण के प्रभाव के कारण इस वर्ष होली का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। 3 मार्च को ग्रहण होने के कारण उस दिन रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण वाले दिन होली खेलना उचित नहीं माना जाता, इसलिए अगले दिन विधि-विधान से रंगों का पर्व मनाना ही शुभ रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शास्त्र सम्मत समय के अनुसार ही पर्वों का पालन करें।
