गोरखपुर
बीमारी से जूझ रही किशोरी को बीआरडी के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से निकाला
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने जटिल सर्जरी और समय पर रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश करते हुए 14 वर्षीय किशोरी की जान बचाई। आंत संबंधी गंभीर बीमारी से जूझ रही किशोरी निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद और गंभीर हालत में पहुंची थी, लेकिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग की सतत निगरानी, चरणबद्ध ऑपरेशन और सटीक उपचार से अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
बिछिया क्षेत्र के टोला खजुरहिया निवासी प्रमोद राजभर की पुत्री काजल को नवंबर 2024 में उल्टी और पेट दर्द की शिकायत शुरू हुई। जांच के बाद एक निजी अस्पताल में बताया गया कि उसकी आंत फट गई है और तत्काल ऑपरेशन आवश्यक है। स्वजनों ने लगभग 45 हजार रुपये खर्च कर सर्जरी करवाई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद पेट में छह छेद हो गए, जिससे मल बाहर निकलने लगा। हालत बिगड़ने पर स्वजन किशोरी को बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे।
यहां सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक यादव ने मामले को चुनौती के रूप में लिया। एक वर्ष के भीतर उपचार के दौरान किशोरी के तीन बड़े ऑपरेशन करने पड़े। इस लंबी प्रक्रिया में उसे कुल 17 यूनिट रक्त की आवश्यकता हुई। ब्लड बैंक से बिना डोनर के सात यूनिट रक्त उपलब्ध हुआ, जबकि शेष 10 यूनिट रक्त की व्यवस्था सर्जरी विभाग के रेजीडेंट डॉक्टरों और फैकल्टी ने स्वयं रक्तदान कर की। डॉ. अशोक यादव के अनुसार, किशोरी की स्थिति अत्यंत नाजुक थी और समय पर रक्त उपलब्ध होना जीवनरक्षक साबित हुआ। मेडिकल कॉलेज पहुंचने के समय उसका हीमोग्लोबिन मात्र 4.5 ग्राम था।
जांच में यह भी सामने आया कि किशोरी को आंत की टीबी थी, जिसकी पहचान किए बिना निजी अस्पताल में सर्जरी कर दी गई थी। इसी कारण आंत में कई फिस्टुला बन गए। इसके बाद सर्जरी विभाग ने टीबी एवं चेस्ट विभाग से परामर्श कर टीबी की दवा शुरू कराई। पोषण की कमी के चलते उसे हर 15 दिन पर भर्ती कर टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (टीपीएन) और एल्बुमिन चढ़ाया गया, क्योंकि सामान्य भोजन से उसे पोषण नहीं मिल पा रहा था। बाजार में एक टीपीएन और एल्बुमिन की कीमत लगभग 15 हजार रुपये है।
उपचार के दौरान कुल 40 टीपीएन और 40 एल्बुमिन चढ़ाए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब छह लाख रुपये है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा नि:शुल्क मिली। चिकित्सकों ने तीन चरणों में ऑपरेशन कर सभी फिस्टुला बंद किए। पहले चरण में इस वर्ष मार्च में चार फिस्टुला बंद किए गए, जुलाई में शेष दो का ऑपरेशन हुआ। इसके बाद एक नया फिस्टुला बनने पर तीसरे चरण में पुनः सर्जरी की गई। लगातार उपचार और चिकित्सकों के प्रयासों से किशोरी अब पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है।
