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गाजीपुर

नगौरा गौशाला की बदहाल स्थिति से ग्रामीण परेशान

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गौवंश संरक्षण योजनाओं की जमीनी हकीकत पर उठे सवाल

भीमापार (गाजीपुर) जयदेश। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है, तब से राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में गौवंश संरक्षण एक अहम मुद्दा रहा है। सरकार ने आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने, किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और गोवंश के संरक्षण के लिए कई योजनाएं लागू कीं, साथ ही इसके लिए पर्याप्त बजट भी आवंटित किया गया।

हालांकि, जमीनी स्तर पर इन योजनाओं की स्थिति चिंताजनक दिखाई दे रही है। गौशालाओं में व्यवस्थाओं की कमी के चलते न केवल पशु असुरक्षित हैं, बल्कि कई स्थानों पर उनकी हालत अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

गाजीपुर जिले के सादात विकास खंड के मिर्जापुर ग्राम पंचायत अंतर्गत नगौरा स्थित गौशाला इसका एक उदाहरण है। यहां की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है और केवल आश्वासन ही मिले हैं।

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वर्तमान में गौशाला में लगभग 96 पशु मौजूद हैं, जिनकी देखभाल के लिए मात्र दो कर्मचारी मगरू और मक्कर तैनात हैं। देखभाल करने वाले कर्मचारियों के अनुसार, यहां पशुओं की मृत्यु होने पर उन्हें गौशाला परिसर में ही दफनाया जाता है, लेकिन गड्ढों की गहराई पर्याप्त नहीं होती। इससे सड़न और दुर्गंध फैलती है, जो आसपास के ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी भय सताने लगा है।

पशुओं के चारे को लेकर भी विरोधाभासी जानकारी सामने आई है। एक कर्मचारी के अनुसार, प्रतिदिन एक बोरी चोकर दिया जाता है, जबकि दूसरे के मुताबिक यही मात्रा दो दिन तक चलती है। वहीं स्थानीय निवासी विजय यादव का कहना है कि पशुओं को केवल भूसा और पानी ही दिया जाता है, जिससे उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है।

गौशाला की गंदगी और मृत पशुओं से उठने वाली बदबू के कारण आसपास के लोग बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि हवा चलने पर पूरे गांव में दुर्गंध फैल जाती है, जिससे न तो वे ठीक से खा पाते हैं और न ही सो पाते हैं।

ग्रामीणों—विजय यादव, राकेश, हरिकेश, उमेश, शिवशंकर, कमलेश, गोलू, गुड्डू, डब्लू और पंकज—ने बताया कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस मामले में डिप्टी सीएचओ डॉ. अल्प नारायण सिंह ने बताया कि हाल ही में एक पशु की मृत्यु हुई थी, जिसे गड्ढा खोदकर दफना दिया गया। उनके अनुसार, पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा और चोकर उपलब्ध है तथा पानी के लिए समर्सिबल पंप लगाया गया है।

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वहीं, ग्राम पंचायत अधिकारी शशि यादव ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही यहां के पशुओं को किसी बड़ी गौशाला में स्थानांतरित किया जाएगा।

कुल मिलाकर, सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर इस गौशाला की स्थिति से साफ नजर आता है, जिससे न केवल पशुओं का जीवन संकट में है, बल्कि स्थानीय ग्रामीण भी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

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