गाजीपुर
मेडिकल कॉलेज गाजीपुर के आर्थोपेडिक वार्ड की बदहाल व्यवस्था, मरीजों ने लगाए गंभीर आरोप
गाजीपुर (जयदेश)। महर्षि विश्वामित्र राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, गाजीपुर से संबद्ध जिला चिकित्सालय के आर्थोपेडिक वार्ड की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। जयदेश समाचार पत्र की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कई चोटिल मरीज 12 से 24 घंटे तक इलाज के लिए इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।
मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि वार्ड में तैनात नर्सें केवल औपचारिकता निभाते हुए दो इंजेक्शन लगाकर चली जाती हैं, जबकि डॉक्टरों द्वारा मरीजों की नियमित जांच नहीं की जा रही है। कई ऐसे मरीज भी हैं जिनका एक्स-रे एक दिन पहले हो चुका है, लेकिन रिपोर्ट देखने या आगे की उपचार प्रक्रिया शुरू करने के लिए कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं है।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्वास्थ्यकर्मियों का व्यवहार बेहद अमानवीय है। एक परिजन के अनुसार, “अगर हम इलाज के लिए दबाव बनाते हैं तो कहा जाता है कि मरीज को यहां से हटा लो, नहीं तो हम खुद बाहर कर देंगे।” इस तरह की भाषा से मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश व्याप्त है।
जयदेश न्यूज टीम ने जब इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. आनंद मिश्रा से बातचीत की, तो उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष मरीज को समस्या है तो जानकारी दी जाए। इस पर संवाददाता ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक मरीज की नहीं, बल्कि पूरे वार्ड की समस्या है। बातचीत के दौरान भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।

हालांकि, एक कन्हैया लाल राजभर जिसका चेस्ट और गार्डन के पास चोट लगी है और सर पर भी गंभीर चोट है जो प्राइवेट बस वाले ने लड़ा दिया और वह व्यक्ति 24 घंटे से ज्यादा भारती है लेकिन उसे नियमित डॉक्टर ने देखा नहीं इस मामले में सीएमएस चौधरी को जब अवगत कराया गया तो उनके निर्देश के बाद डॉक्टर द्वारा जांच की गई, लेकिन अन्य मरीजों को ऐसी सुविधा नहीं मिल सकी।
मौके पर मौजूद कई लोगों ने बताया कि “यहां 12 से 24 घंटे तक इंतजार के बावजूद सही इलाज नहीं हो रहा है।” वही शिवकुमार पांडे ग्राम रानीपुर जो 24 घंटे से भर्ती हैं जिनका भाई अवधेश पांडे ने डॉक्टर मिश्रा से बात करके अपने नाराजगी को दर्ज कराया लेकिन समाचार बल्कि उन्होंने बताया कि एक्स-रे 11:00 बजे का हुआ है और अभी तक उसकी कोई देखने तक नहीं आया यह है स्थितियां यहां की लोगों ने कहा कि भगवान भरोसे ही व्यवस्थाएं इस अस्पताल की चल रही है
मरीजों के परिजनों का कहना है कि इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की अनुपस्थिति, दवाओं की कमी और अव्यवस्था का आलम साफ देखा जा सकता है। वार्ड में मरीजों की संख्या अधिक है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित नजर आ रही हैं।
आर्थोपेडिक वार्ड की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
