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वाराणसी

दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला, मरीजों की जेब पर पड़ेगा असर

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वाराणसी। एक अप्रैल से आवश्यक दवाओं की कीमतों में वृद्धि लागू होने जा रही है, जिससे आम मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने वार्षिक थोक मूल्य सूचकांक में हुए बदलाव के आधार पर 767 जरूरी दवाओं के दाम में 0.64 प्रतिशत की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। इस फैसले का असर पूर्वांचल के 10 जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिलेगा, जहां दवाओं की खपत काफी अधिक है।

दवा विक्रेता समिति के अनुसार पूर्वांचल में प्रतिदिन 30 करोड़ रुपये से अधिक की दवाओं की बिक्री होती है। गोरखपुर और वाराणसी इस क्षेत्र के प्रमुख मेडिकल हब के रूप में जाने जाते हैं, जहां से बिहार और नेपाल तक दवाओं की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में कीमतों में मामूली वृद्धि भी कुल कारोबार पर लाखों रुपये का अतिरिक्त प्रभाव डालने वाली है।

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सप्तसागर दवा विक्रेता समिति के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि यह बढ़ोतरी राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची 2022 के अंतर्गत आने वाली दवाओं पर लागू होगी। इस सूची में जीवनरक्षक दवाओं के साथ-साथ सामान्य बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं, जिससे इसका दायरा व्यापक हो जाता है।

कीमतों में सबसे अधिक असर संक्रमण से जुड़ी एंटीबायोटिक दवाओं पर पड़ेगा, जिनमें टैबलेट, सिरप और इंजेक्शन शामिल हैं। जिले के निजी अस्पतालों में करीब 90 प्रतिशत मरीजों को एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, ऐसे में इनके महंगे होने से मरीजों का खर्च बढ़ना स्वाभाविक है। इसके अलावा पेनकिलर, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं, मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप से संबंधित दवाएं, स्टेरॉयड, विटामिन और खनिज सप्लीमेंट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी लागू होगी, जिससे आमजन पर समग्र रूप से आर्थिक दबाव बढ़ने की संभावना है।

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