पूर्वांचल
मशरूम और अन्य सब्जियों की खेती से किसानों को होगी आय में वृद्धि
मऊ जिले में किसानों की आय बढ़ाने और उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कृषि क्षेत्र में नए प्रयास हो रहे हैं। उद्यान विभाग की योजनाओं से किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ मशरूम, मधुमक्खी पालन, और अन्य नवाचारों से अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं।
सरकार की सहायता से किसानों को स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसे फलों की खेती के साथ-साथ मशरूम उत्पादन की तरफ प्रेरित किया जा रहा है। जनपद मऊ में मशरूम की बढ़ती मांग के बावजूद स्थानीय स्तर पर इसका उत्पादन सीमित था लेकिन हाल ही में फतेहपुर मंडाव ब्लॉक के परसूपुर दिघेडा गांव के किसान श्याम सुंदर सिंह ने इस दिशा में पहल की।

उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मशरूम उत्पादन इकाई कंपोस्ट मेकिंग इकाई और स्पान मेकिंग इकाई की स्थापना के लिए आवेदन किया, जिसे मार्च 2023 में स्वीकृति मिली।
किसान के पुत्र अंजनी कुमार सिंह ने बैंक लोन लेकर इकाई स्थापित की और अब दो चैंबर में 30 टन प्रतिवर्ष मशरूम उत्पादन हो रहा है। जल्द ही स्पान यूनिट की स्थापना का कार्य भी पूरा किया जाएगा। किसान ने 40% लागत पर अनुदान के लिए विभाग में आवेदन किया है और भविष्य में चैंबर की संख्या आठ तक बढ़ाने की योजना है।इस इकाई का निरीक्षण जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति ने किया और इसे मानक के अनुरूप पाया।
यह इकाई मऊ जिले की पहली आधुनिक मशरूम इकाई है जिससे न केवल किसान की आय बढ़ेगी बल्कि अन्य किसानों को भी प्रेरणा मिलेगी। किसान भविष्य में मशरूम का अचार, प्रसंस्करण और डिब्बाबंद उत्पादों के उद्योग स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत जिले में एसी मशरूम उत्पादन इकाइयां लगाई गई हैं जिनसे मऊ जिले को मशरूम उत्पादन में अग्रणी बनाया जाएगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
