वाराणसी
“धर्म, माता-पिता और देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य” : देवकीनंदन ठाकुर
सिय पिय मिलन महामहोत्सव: तृतीय दिवस पर भव्य आयोजन
वाराणसी। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत मैदान में श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के अंतर्गत चल रहे नौ दिवसीय सिय पिय मिलन महामहोत्सव के तीसरे दिन रविवार को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रख्यात भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ, जिसकी शुरुआत 108 रजत कलशों के साथ भव्य शोभायात्रा से हुई। महामहोत्सव के तीसरे दिन के कार्यक्रमों ने भक्तों को धर्म और आस्था के रंग में सराबोर कर दिया।
सनातन बोर्ड के गठन का आह्वान
कथा के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने धर्म और मंदिरों की रक्षा के लिए सनातन बोर्ड के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “तिरुपति जैसे जघन्य पाप को दोहराने से रोकने के लिए सनातन बोर्ड जरूरी है। मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करना समय की मांग है।” उन्होंने ज्ञानवापी और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि काशी की भूमि पर किया गया यह आह्वान दूर तक जाएगा।
काशी की महिमा का वर्णन
ठाकुर जी ने काशी की महिमा बताते हुए कहा कि यह स्थान बाबा विश्वनाथ का आनंद वन है और प्रलयकाल में भी यह अविनाशी नगरी त्रिशूल पर सुरक्षित रहती है। उन्होंने धर्म, माता-पिता और देश की सेवा को जीवन का सबसे बड़ा कर्तव्य बताया। साथ ही भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि यह प्रेतात्माओं तक का कल्याण कर सकती है।
कथा शुभारंभ से पहले गुरुकृपा के धूपचंडी स्थित आवास से 108 रजत कलशों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में पीत वस्त्रधारी महिलाएं सिर पर कलश लेकर आगे चल रही थीं, जबकि पुरुष बैंड-बाजे के साथ नाचते-गाते शामिल हुए। शोभायात्रा का नेतृत्व सिद्धसंत प्रेम सरोवर वृंदावन के श्रीरामरस महाराज, गौतम बाबा, विशाल दास महाराज और अयोध्या के नरहरि दास महाराज ने किया।
रामलीला में श्रीराम जन्म का मंचन
रामलीला मंचन के दौरान प्रभु श्रीराम के जन्म की लीला प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर ‘अँगने में बधइया बाजे, जायो कौशल्या जी ने लल्ला’ जैसे गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम के दौरान घोड़े का खेल, बंदर-मदारी का खेल आदि भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।
कथा के शुभारंभ पर दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम में सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिहारी लाल शर्मा, महापौर अशोक तिवारी, अशोक अग्रवाल सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। संचालन जयशंकर शर्मा और अशोक मिश्रा ने किया। अंत में व्यासपीठ की आरती विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों द्वारा उतारी गई।
