गोरखपुर
गोरखपुर में “बहू–बेटी सम्मेलन” पर मंथन, महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा के लिए बना एक्शन प्लान
गोरखपुर। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत आधार देने के उद्देश्य से गोरखपुर के एनेक्सी सभागार में “बहू–बेटी सम्मेलन” पर एकदिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। यूनिसेफ और पीजीआईएमएस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला कल्याण विभाग सहित विभिन्न संस्थाओं के अधिकारियों ने भाग लेकर जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर पुलिस महानिदेशक (गोरखपुर जोन) मुथा अशोक जैन ने कहा कि यह पहल केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य गांव-गांव तक पहुंचकर पीड़ित महिलाओं और किशोरियों की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोरखपुर जोन सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, जहां घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव जैसी चुनौतियां सामने आती रहती हैं। ऐसे में “बहू–बेटी सम्मेलन” इन समस्याओं के समाधान की दिशा में एक मजबूत प्लेटफॉर्म साबित होगा।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ ने पुलिसकर्मियों को महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल कानून लागू करना पर्याप्त नहीं, बल्कि पीड़ितों के प्रति सहानुभूति और भरोसे का माहौल बनाना भी जरूरी है। इसके लिए पुलिस और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद अहम है।
कार्यशाला में पीजीआईएमएस की सह निदेशक डॉ. लीना और यूनिसेफ के मंडलीय बाल संरक्षण सलाहकार शैलेश प्रताप सिंह ने “बहू–बेटी सम्मेलन” की कार्ययोजना, उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि इस अभियान के तहत 18 से 35 वर्ष की विवाहित महिलाओं और 15 से 18 वर्ष की किशोरियों को केंद्र में रखकर जागरूकता, काउंसलिंग और संवाद के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा।
इस पहल में महिला पुलिसकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा बहुएं, स्वयं सहायता समूह और विभिन्न विभाग मिलकर गांव-गांव में संवाद स्थापित करेंगे। साथ ही “मिशन शक्ति” केंद्रों को और प्रभावी बनाकर उन्हें काउंसलिंग हब के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि पीड़ित महिलाओं तक त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके।
कार्यक्रम के दौरान “बहू–बेटी सम्मेलन” के लोगो का अनावरण भी किया गया। महिला पुलिस अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि विश्वास और संवाद ही महिलाओं की समस्याओं के समाधान की सबसे बड़ी कुंजी है।
इस कार्यशाला के जरिए महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद और मजबूत हुई है।
