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वाराणसी

कांग्रेस नेताओं को किया गया नजरबंद, विरोध कार्यक्रम रहा बाधित

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वाराणसी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान के विरोध में असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्वा शर्मा का पुतला दहन करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। हालांकि इस प्रस्तावित लोकतांत्रिक विरोध को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए पुलिस के माध्यम से महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल और महानगर अध्यक्ष युवा कांग्रेस चंचल शर्मा समेत कई कांग्रेस नेताओं को उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया, जिससे तय कार्यक्रम संपन्न नहीं हो सका।

इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता के प्रति हिमंता विश्वा शर्मा द्वारा प्रयुक्त भाषा अमर्यादित, अशोभनीय और अपमानजनक है, जो न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक मर्यादाओं का भी अपमान है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद और शालीन राजनीति में विश्वास रखती है, लेकिन वर्तमान समय में भाजपा के नेतृत्व में राजनीति जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार विरोध और असहमति को दबाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा शांतिपूर्ण विरोध का कार्यक्रम तय किया गया था, लेकिन सरकार ने पूर्व से ही दमनकारी नीति अपनाते हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही रोक दिया, जिससे स्पष्ट होता है कि विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

राघवेंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं को नजरबंद करना, पुलिस बल का उपयोग कर प्रदर्शन को रोकना यह दर्शाता है कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान नहीं करती। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार जनता की आवाज दबाई जाती रही तो यह संविधान के लिए भी नुकसानदायक साबित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान माहौल में सत्ताधारी दल के खिलाफ बोलना अपराध जैसा बना दिया गया है, लेकिन कांग्रेस पार्टी भयभीत होने वाली नहीं है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

उन्होंने मांग की कि हिमंता विश्वा शर्मा अपने बयान के लिए देश की जनता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। चेतावनी दी कि जब तक माफी नहीं मांगी जाएगी, तब तक पार्टी का विरोध और आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर नहीं होगा, बल्कि वे और अधिक मजबूती के साथ लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

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