वाराणसी
ओवैसी के बयान पर काशी के संत नाराज: मंदिर में हिंदू कर्मचारी होने पर उठाए सवाल
वाराणसी। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) बोर्ड पर दिए बयान पर नाराजगी जताई है। ओवैसी ने सोशल मीडिया पर टीटीडी बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष बीआर नायडू के इस बयान पर सवाल उठाए थे कि तिरुपति मंदिर में केवल हिंदू कर्मचारी ही होने चाहिए।
जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि तिरुपति जैसे पवित्र स्थल पर गैर-हिंदू कर्मचारियों की नियुक्ति अनुचित है और मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है कि वहां केवल हिंदू ही कार्य करें। उन्होंने कहा, “हमारे मंदिरों की सुचिता और पवित्रता का ध्यान गैर-हिंदू कर्मचारी कैसे रख सकते हैं। यदि इस संदर्भ में कोई निर्णय लिया गया है, तो उसका स्वागत होना चाहिए।”
वक्फ बोर्ड पर ओवैसी के बयान पर आपत्ति
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने ओवैसी के वक्फ कानून संबंधी बयान की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि “वक्फ बोर्ड कोई मंदिर या पवित्र स्थल नहीं है। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।”
जितेंद्रानंद ने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल भारत के बड़े भूभाग पर कब्जे के लिए किया जा रहा है और यह तुष्टीकरण की राजनीति है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब दुनिया के 56 इस्लामी देशों में वक्फ बोर्ड जैसी कोई संस्था नहीं है, तो हिंदुस्तान में इसकी जरूरत क्यों है।
ओवैसी का बयान
असदुद्दीन ओवैसी ने टीटीडी बोर्ड अध्यक्ष बीआर नायडू के बयान का हवाला देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था, “टीटीडी के अध्यक्ष का कहना है कि तिरुमाला में केवल हिंदुओं को ही काम करना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति को अनिवार्य करना चाहती है।” ओवैसी ने सवाल उठाया कि जिस तरह हिंदू धर्मस्थलों में केवल हिंदू कर्मचारियों की अनिवार्यता है, वैसे ही वक्फ बोर्ड में भी मुस्लिम कर्मचारी होने चाहिए।
बीआर नायडू का बयान
बीआर नायडू ने टीटीडी अध्यक्ष के रूप में अपने पहले बयान में कहा था कि तिरुमाला में कार्यरत सभी कर्मचारी हिंदू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस फैसले को लागू करने के लिए कई मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
