अपराध
आईआईटी-बीएचयू गैंगरेप केसः छात्रा को अब भी ‘इंसाफ का इंतजार’
परिजनों और मित्रों ने आरोपियों से बनाई दूरी
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक बहुचर्चित गैंगरेप केस को एक साल से अधिक समय हो चुका है। इस मामले में आरोपियों को जमानत मिलने और गवाहों के बयान अब तक दर्ज नहीं होने के कारण केस सुर्खियों में बना हुआ है। पीड़िता का कहना है कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए न्याय की प्रक्रिया में बहुत समय लग रहा है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 1-2 नवंबर, 2023 की रात की है। जब बीएचयू की छात्रा हॉस्टल से बाहर टहलने के लिए निकली थी। वह कैंपस में लक्ष्मण बाबा मंदिर की ओर जा रही थी कि तभी तीन व्यक्तियों ने उसे रोका और एक कोने में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद छात्रा किसी तरह अपने हॉस्टल पहुंची और गार्ड की मदद से खुद को सुरक्षित किया।
आरोपी और उनकी पृष्ठभूमि

इस मामले में तीन आरोपी कुणाल पांडेय, सक्षम पटेल और आनंद उर्फ अभिषेक चौहान सभी भाजपा आईटी सेल से जुड़े हुए हैं। वारदात के बाद इन्हें पकड़ने में देरी हुई और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से इनमें से दो को जमानत मिल चुकी है। तीसरे आरोपी की रिहाई अभी भी प्रक्रियाधीन है।
पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया
पुलिस ने इस मामले में सबूत जुटाने और मेडिकल रिपोर्ट हासिल करने के लिए घटनास्थल का निरीक्षण किया। आरोपियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से की गई। पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए गैंगरेप की धाराएं जोड़ दीं और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

यह मामला वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है, लेकिन बावजूद इसके पीड़िता की ओर से जुड़े गवाहों के बयान अब तक पूरे नहीं हुए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि वे न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
आरोपियों की रिहाई और राजनीतिक प्रभाव
जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी अब वाराणसी में ही निवास कर रहे हैं। पुलिस और अदालत का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी नियमित रूप से कोर्ट में पेश हो रहे हैं। आरोपियों का भाजपा से जुड़े होने के कारण कई राजनैतिक नेता इस मामले में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
पीड़िता अपने बयान पर कायम, फैसला आने में अभी देरी संभव
गैंगरेप की शिकार छात्रा का कहना है कि घटना के बाद से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। कई बार धमकियों का सामना करना पड़ा है। उसे हर वक्त डर लगा रहता है और वह चाहती है कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले ताकि उसे इंसाफ मिल सके।
पीड़िता अपने बयान पर दृढ़ता से कायम है। एडीजीसी (फौजदारी) मनोज गुप्ता ने बताया कि कोर्ट में पीड़िता ने पूरे घटनाक्रम को मौखिक और लिखित रूप से प्रस्तुत किया है। घटना के समय पीड़िता के साथ मौजूद उसका मित्र भी सुनवाई की तारीख पर अदालत में उपस्थित रहता है।

बचाव पक्ष की कोशिश लगातार यह रहती है कि किसी न किसी बहाने मामले में देरी हो जाए और अगली तारीख बढ़ती रहे। हालांकि, मनोज गुप्ता का कहना है कि पीड़िता का बयान और पुलिस की प्रभावी विवेचना मामले में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान कर सकती है। लेकिन इस पर अंतिम निर्णय कब तक आएगा, इसे लेकर कुछ कहना अभी संभव नहीं है।
परिजनों और मित्रों ने आरोपियों से बनाई दूरी
इस मामले में जेल से जमानत पर बाहर आए आरोपी कुणाल पांडेय और आनंद चौहान से उनके अपने भी दूरी बनाए हुए हैं। भाजपा नेता या पार्टी से जुड़े लोग अब दोनों से संपर्क में नहीं रहते। दोस्तों ने भी दोनों से बातचीत बंद कर दी है। वहीं, उनके आसपास के पड़ोसी भी किसी प्रकार का संपर्क या सहानुभूति नहीं दिखा रहे हैं। दोनों आरोपी अधिकतर समय अपने घरों में ही बिताते हैं।
