वाराणसी
Budget 2026 : दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी रेल कॉरिडोर को मिलेगी नई रफ्तार
वाराणसी। केंद्रीय बजट 2026–27 में रेल अवसंरचना के लिए किए गए विशेष प्रावधानों से दिल्ली से वाराणसी होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित रेल कॉरिडोर के तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। बजट में नए रेल कॉरिडोर, मल्टी-ट्रैक परियोजनाओं और लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे इस महत्वाकांक्षी योजना के शीघ्र क्रियान्वयन के संकेत मिलते हैं।
इस रेल कॉरिडोर के निर्माण से उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहर आधुनिक और तेज रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी। वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी जैसे धार्मिक, शैक्षिक और व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच और अधिक सुगम होने की संभावना है।
केंद्रीय बजट में रेलवे के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाए जाने के बाद इस कॉरिडोर के अंतर्गत नई रेल लाइनों के निर्माण, ट्रैक डबलिंग और ट्रिपलिंग, पूर्ण विद्युतीकरण, आधुनिक सिग्नल प्रणाली और विश्वस्तरीय स्टेशनों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही, बजट में घोषित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और फ्रेट टर्मिनल इस रूट पर माल ढुलाई को अधिक सस्ता और तेज बनाएंगे।
वाराणसी के लिए यह परियोजना विशेष महत्व रखती है। बजट में पर्यटन, विरासत संरक्षण और ओडीओपी उत्पादों को बढ़ावा देने की घोषणाओं के साथ यह रेल कॉरिडोर काशी के उद्योग, व्यापार और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक होगा। इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार के रूप में पहचाने जाने वाले सिलीगुड़ी को भी इस कॉरिडोर से अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। चाय उद्योग, सीमावर्ती व्यापार और पर्यटन क्षेत्र को इससे सीधा लाभ मिलने की संभावना है। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट के सहयोग से दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी रेल कॉरिडोर देश की आर्थिक प्रगति और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।
इस तरह, केंद्रीय बजट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई दिशा देने का काम किया है। इससे न केवल यात्रा सुविधाओं का विस्तार होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। यह रेल कॉरिडोर आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी व्यापक प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है। इसके सफल कार्यान्वयन से देश के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ेगा, जो समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
