वाराणसी
सुरों की याद में डूबी काशी, आशा भोसले को किया नमन
वाराणसी। भारत की सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका और भारत रत्न से सम्मानित महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन एवं विश्वविख्यात संगीत हस्ती आशा भोसले के निधन पर वाराणसी में शोक की लहर दौड़ गई। उनके सम्मान में शहर के सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन वाराणसी डर्बी शायर क्लब द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर के नेतृत्व में रविवार को पितर कुंडा स्थित प्राचीन कुंड पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम शाम लगभग 4:00 बजे प्रारंभ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय आशा भोसले के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और कैंडल जलाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति
इस अवसर पर क्लब अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर ने कहा कि आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महान संगीतज्ञ Deenanath Mangeshkar के परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ मिलकर भारतीय संगीत इतिहास में अमिट छाप छोड़ी और अपनी सुरीली आवाज से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के श्रोताओं का दिल जीता।

उन्होंने कहा कि आशा भोसले ने अपने लंबे और सफल संगीत जीवन में हिंदी, मराठी, बंगाली, गुजराती, तमिल, तेलुगु, पंजाबी सहित कई भाषाओं में हजारों गीत गाए। फिल्म संगीत, ग़ज़ल, भजन और पॉप संगीत जैसे विभिन्न विधाओं में उनकी अद्वितीय गायकी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। वक्ताओं ने कहा कि आशा भोसले जैसी महान कलाकार का जाना संगीत जगत के लिए एक युग का अंत है। उनके गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
इस श्रद्धांजलि सभा में शहर के कई गणमान्य नागरिक और क्लब के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि आशा भोसले का योगदान भारतीय संगीत के इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
श्रद्धांजलि देने वालों में प्रमुख रूप से शामिल रहे:
गुफरान अहमद, हैदर मुलाई, जावेद हुसैन, समीम खान, सैयद दुलारे हुसैन, चिंतित बनारसी, राशिद खान, शकील खान, विक्की यादव सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
