गाजीपुर
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स बने शो-पीस
गाजीपुर। रोडवेज डिपो की बसों से यात्रा करने वाले यात्रियों को रास्ते में बीमार पड़ने की स्थिति में प्राथमिक उपचार मिलना मुश्किल हो रहा है। डिपो के बेड़े में शामिल 89 बसों में से 40 बसों में फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध ही नहीं है, जबकि जिन बसों में बॉक्स लगाए गए हैं, उनमें दवाओं के स्थान पर खाली पानी की बोतल या अन्य सामान रखा मिला है। इस तरह फर्स्ट एड बॉक्स केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
नियमों के अनुसार प्रत्येक रोडवेज बस में दवाओं से युक्त फर्स्ट एड बॉक्स होना अनिवार्य है, लेकिन डिपो प्रबंधन इस दिशा में लापरवाही बरतता दिखाई दे रहा है। यात्रियों की सुविधा की अनदेखी करते हुए व्यवस्था केवल किराया वसूली तक सीमित रह गई है।
डिपो से लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, अकबरपुर, वाराणसी, आजमगढ़ और मऊ समेत विभिन्न जनपदों के लिए बसों का संचालन किया जाता है। स्थानीय रूटों पर भी बसें चलती हैं और प्रतिदिन करीब 1500 से अधिक यात्री सफर करते हैं, ऐसे में प्राथमिक उपचार की सुविधा का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। बसों में आपात स्थिति के लिए आवश्यक हथौड़ी तक गायब है, जिससे दुर्घटना की स्थिति में खिड़कियों के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
गाजीपुर से वाराणसी रूट की एक बस में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला, जबकि इस मार्ग पर यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। वहीं गाजीपुर से शेरपुर जाने वाली बस में बॉक्स तो मौजूद है, लेकिन उसमें दवाएं नहीं हैं और वह केवल दिखावे के रूप में रखा हुआ है।
इस संबंध में स्टेशन प्रभारी अभिषेक सिंह का कहना है कि अधिकांश बसों में फर्स्ट एड बॉक्स उपलब्ध हैं और जिन बॉक्स में दवाएं नहीं हैं, उनमें शीघ्र दवाएं रखवा दी जाएंगी।
