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वाराणसी

मिर्जामुराद थाने में अवैध वसूली के पैसों के बंटवारे को लेकर दरोगा और सिपाही के बीच मारपीट

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मिर्जामुराद (वाराणसी)। स्थानीय थाना परिसर में गुरुवार की रात नवनिर्मित बैरक में शराब और मुर्गे की दावत के दौरान थाने के दरोगा और सिपाही नशे में धुत होकर आपस में भिड़ गए। विवाद का कारण अवैध वसूली के लाखों रुपये के बंटवारे को लेकर पैदा हुआ मतभेद बताया जा रहा है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में पुलिस विभाग की छवि को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

सूत्रों के अनुसार, मिर्जामुराद थाने में कारखास (थाने का मुख्य प्रबंधक) पद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस विवाद के पीछे क्षेत्र में अवैध वसूली से प्राप्त होने वाले पैसों का बंटवारा प्रमुख कारण था। इसी मुद्दे पर गुरुवार रात नवनिर्मित बैरक की छत पर शराब और मुर्गे की दावत के दौरान मामला गरमा गया।

शुरुआत में यह बहस तू-तू, मैं-मैं तक सीमित रही, लेकिन देखते ही देखते मामला हाथापाई और मारपीट तक पहुंच गया। नशे में धुत पुलिसकर्मियों ने एक-दूसरे को देख लेने की धमकी दी और जमकर हाथापाई हुई।

सूत्रों की मानें तो थाने में कारखास को लेकर विवाद बीते एक महीने से चल रहा था। इसे सुलझाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप भी किया था, लेकिन विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ। गुरुवार की रात जब शराब के नशे में पुलिसकर्मियों ने अपनी भड़ास निकाली, तो मामला हिंसक हो गया।

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इस पूरे मामले पर जब थाना प्रभारी सुधीर कुमार त्रिपाठी से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “कुछ बाहरी तत्व शराब के नशे में विवाद कर रहे थे। बैरक के किसी विवाद की कोई जानकारी नहीं है।”

हालांकि, स्थानीय लोगों और पुलिस विभाग के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह विवाद पुलिसकर्मियों के बीच हुआ था और इसका कारण अवैध वसूली के पैसों का बंटवारा था।

इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों के बीच पुलिस प्रशासन की छवि को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आम जनता यह सोचने पर मजबूर है कि जिन पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, वही लोग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस मामले में उच्च अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।

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