वाराणसी
बजट 2026 से वाराणसी–पूर्वांचल के निर्यातकों को बड़ी राहत की उम्मीद
वाराणसी। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देशभर के निर्यातकों में खासा उत्साह है। विशेष रूप से वाराणसी और पूर्वांचल क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को इस बजट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। निर्यातकों का मानना है कि यदि लागत घटाने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने से जुड़े प्रावधान किए गए तो घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) ने बजट से पूर्व केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपते हुए इनपुट लागत कम करने, निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सशक्त करने पर जोर दिया है। फियो का कहना है कि इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
फियो के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने इनवर्टेड कस्टम ड्यूटी स्ट्रक्चर को निर्यातकों की सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि कच्चे माल और कंपोनेंट्स पर लगने वाली ऊंची आयात शुल्क के कारण बनारस के टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट, हैंडीक्राफ्ट, केमिकल और लेदर सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है।

वाराणसी के पावरलूम, सिल्क और कारपेट उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि यदि ड्यूटी का युक्तिकरण किया जाता है तो इनपुट लागत में कमी आएगी और वर्किंग कैपिटल पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा। इससे उत्पादन और निर्यात दोनों को गति मिलने की संभावना है।
पूर्वांचल के निर्यातक लंबे समय से ऊंचे फ्रेट चार्ज और विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता से परेशान हैं। उनका मानना है कि यदि मजबूत घरेलू शिपिंग इकोसिस्टम विकसित किया जाता है तो फ्रेट लागत कम होगी और निर्यात में स्थिरता आएगी।
निर्यातकों ने अनुसंधान एवं विकास पर 200 से 250 प्रतिशत वेटेड टैक्स डिडक्शन की बहाली, ओवरसीज मार्केटिंग खर्च पर 200 प्रतिशत टैक्स छूट तथा नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए 15 प्रतिशत रियायती कॉरपोरेट टैक्स की समय-सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे प्रावधान वाराणसी और पूर्वांचल को ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
