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वाराणसी

पांच साल तक के बच्चों में बढ़ा नेत्र कैंसर का खतरा

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छोटे बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा के केस बढ़े

वाराणसी। शहर में छोटे बच्चों में आंख के कैंसर के मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। एक महीने से पांच साल तक की उम्र के 20 बच्चों में इस गंभीर बीमारी की पुष्टि हुई है। इन सभी का उपचार बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, इनमें से 40 प्रतिशत बच्चों की कैंसरग्रस्त आंख को निकालना पड़ा, जबकि शेष 60 प्रतिशत का इलाज कीमोथेरेपी के जरिए किया जा रहा है।

डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की आंखों में अंधेरे में बिल्ली जैसी चमक दिखाई देती है। अधिकांश मरीज पूर्वांचल के विभिन्न जिलों और बिहार से आए हैं। सभी बच्चों में रेटिनोब्लास्टोमा नामक दुर्लभ लेकिन जानलेवा नेत्र कैंसर पाया गया है। मार्च माह में तीन नए मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जबकि अन्य मामले पिछले छह महीनों में सामने आए।

बीएचयू के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरपी मौर्य के अनुसार, बच्चों की आंखों में कैंसर की गांठ तेजी से फैल रही थी और कुछ मामलों में यह दृष्टि तंत्रिका के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचने की स्थिति में था। उपचार के तहत बच्चों को कीमोथेरेपी दी गई और माइक्रो सर्जरी के माध्यम से ट्यूमर निकाला गया।

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उन्होंने बताया कि सर्जरी के दौरान सबसे बड़ी चुनौती छोटे बच्चों को सुरक्षित एनेस्थीसिया देना और आंख की नाजुक नसों को बचाना रहा। जिन बच्चों की आंख निकालनी पड़ी, उन्हें कृत्रिम आंख लगाई गई है। समय रहते पहचान होने पर इस बीमारी का इलाज सर्जरी से संभव है।

डॉक्टरों के मुताबिक, रेटिनोब्लास्टोमा मुख्य रूप से छोटे बच्चों में होने वाला कैंसर है, जो आंख के पिछले हिस्से रेटिना की कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बढ़ने पर विकसित होता है। करीब 40 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी आनुवंशिक कारणों से होती है और यदि माता-पिता में कैंसर का इतिहास हो तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ सकता है।

वाराणसी के पिंडरा क्षेत्र के 14 माह के एक बच्चे की दोनों आंखों में असामान्य चमक और पुतलियों का फैलाव पाया गया। जांच में दोनों आंखों में कैंसर की पुष्टि हुई, जो आनुवंशिक कारणों से हुआ था। विशेषज्ञों ने सर्जरी और विशेष कीमोथेरेपी से एक आंख की रोशनी बचा ली, जबकि दूसरी आंख की दृष्टि प्रभावित हो गई।

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भभुआ (बिहार) के आठ माह के एक बच्चे के मामले में हल्की रोशनी में आंख की पुतली बिल्ली की तरह चमकती दिखी। जांच में कैंसर की पुष्टि हुई, जो शुरुआती अवस्था में था। कीमो-रिडक्शन तकनीक और लेजर थेरेपी से बच्चे की आंख और दृष्टि बचा ली गई।

वहीं, गाजीपुर की तीन वर्षीय बच्ची में तिरछी नजर आने की समस्या को शुरुआत में नजरअंदाज किया गया, लेकिन बाद में सूजन और लालपन बढ़ गया। जांच में पता चला कि ट्यूमर बड़ा होकर दृष्टि तंत्रिका तक पहुंचने वाला था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सर्जरी करनी पड़ी और बच्ची की जान बचाने के लिए उसकी आंख निकालनी पड़ी।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इस कैंसर का समय पर इलाज न हो, तो यह दृष्टि तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंच सकता है और शरीर के अन्य अंगों जैसे हड्डियों या लसीका ग्रंथियों में फैलकर जानलेवा साबित हो सकता है।

डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि यदि बच्चों की आंखों में असामान्य चमक, तिरछापन, लगातार लालिमा, सूजन, पुतली के रंग में बदलाव या देखने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराएं, क्योंकि समय पर इलाज से बच्चे की जान और दृष्टि दोनों बचाई जा सकती हैं।

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