गोरखपुर
नारद मोह की कथा सुनकर भाव-विभोर हुए श्रोता
हरपुर-बुदहट (गोरखपुर)। सहजनवां ब्लॉक के ग्राम सिंघवलिया प्राचीन शिव मंदिर परिसर में हो रहे नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ में अयोध्या धाम से पधारे विजय शास्त्री जी महाराज ने नारद मोह कथा का रसपान कराते हुए कहा कि एक बार अपने ब्रह्मचर्य का अहंकार नारद जी के मन में उत्पन्न हुआ। भोलेनाथ के आह्वान पर अहंकार का आहार करने वाले भगवान श्री विष्णु ने एक माया नगरी की स्थापना की।
नारद ने विष्णु से हरि स्वरूप मांगा। श्री विष्णु ने पूरा शरीर मनुष्य का और मुख बंदर का दे दिया, जिससे नारद जी का अहंकार टूट गया। अपने स्वरूप को आईने में देखते ही नाराज होकर श्री हरि विष्णु को नारद जी ने श्रापित किया कि जैसे मैं अपनी शादी न होने से अपनी पत्नी के वियोग में तड़प रहा हूं, उसी प्रकार से आप भी एक दिन अपनी पत्नी के वियोग में तड़पेंगे।
कथा शुभारंभ के पहले धर्मराज गुप्ता ने विधि-विधान से व्यास पीठ विजय शास्त्री जी महाराज की आरती उतारी। यज्ञाचार्य गुरुदेव देवेश त्रिपाठी जी ने बताया कि अग्नि आह्वान के बाद तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का आह्वान यज्ञ स्थल पर किया गया, जिसमें ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों के द्वारा यजमान पूजा-पाठ कर रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्य यजमान सुनीता देवी, विनोद पांडेय, कमलेश गुप्ता उर्फ बबलू, राजू गुप्ता, रविशंकर पांडेय, दीपक प्रजापति, अरुण गौतम, संजय यादव, मनीष यादव, बैजनाथ प्रजापति, रमेश यादव, मेवालाल सिंह, सुनील प्रजापति सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
