गाजीपुर
जखनिया में बंद रेलवे फाटक बना मुसीबत, अंडरपास की मांग तेज
जखनिया (गाजीपुर) जयदेश। जखनिया विधानसभा क्षेत्र के जखनिया बाजार से रेलवे स्टेशन, ब्लॉक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र, बीएसए कार्यालय और तहसील प्रांगण—, पुलिस कोतवाली भुडकुंडा जो लगभग एक किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं—तक पहुंचने में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रेलवे स्टेशन के उत्तरी तरफ स्थित पुराना फाटक बंद कर दिया गया है, जिससे आमजन को अब लगभग एक किलोमीटर दूर बने नए फाटक से होकर आना-जाना पड़ता है। इस बदलाव ने क्षेत्र के व्यापारियों, आम नागरिकों, तहसील कर्मचारियों और अधिकारियों की दिक्कतें बढ़ा दी हैं।
सबसे अधिक परेशानी आपातकालीन स्थितियों में देखने को मिल रही है। तहसील परिसर के पास ही कोतवाली स्थित है, वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीज खासतौर पर ग्रामीण और गरीब वर्ग अक्सर टाली, पिकअप या अन्य साधनों से पहुंचते हैं। कई बार ट्रेनों की लगातार क्रॉसिंग के चलते फाटक लंबे समय तक बंद रहता है, जिससे मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ऐसा लगता है कि समय पर इलाज न मिलने से मरीज की जान नहीं बचाई जा सकती है।
इस गंभीर समस्या को लेकर क्षेत्रीय जनता और व्यापारी संगठनों ने कई बार विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन भी किया, लेकिन अब तक न तो रेलवे प्रशासन और न ही सरकार की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया है। इतना ही नहीं जखनिया का इतना तेजी से विकास हो रहा है कि या आने वाले समय में टाउन एरिया का रूप ले सकती है जिस तरह से बाहरी लोगों का आवागमन और लगातार जखनिया परिक्षेत्र का विकास यह दर्शाता है कि आने वाले समय में जनपद की अच्छी मार्केट के रूप में स्थापित हो सकती है।
इतना ही नहीं भारतीय जनता पार्टी जैसे दल को 2014 में सभी विधानसभाओं से ज्यादा वोट मत जखनिया विधानसभा के लोगों ने दिया था, इतना ही नहीं राजनीतिक दृष्टिकोण से भी जखनिया के कंपनी पहचान बनाकर रखा है, विशेष रूप से कुरकुरा जैसी सिद्ध पीठ और हथियाराम बुढ़िया माई जैसा मंदिर जहां स्वयं वर्तमान मुख्यमंत्री दोनों मंदिरों पर आकर अपना आशीर्वाद लिए उसे समय यह काफी जखनिया में चहल-पहल दिखती है जब नवरात्र का महीना आ जाता है और केवल जखनिया बाजार से 4 किलोमीटर की दूरी पर यह दोनों सिद्ध पीठ स्थापित है।
क्षेत्रवासियों की मांग है कि रेलवे फाटक के स्थान पर एक अंडरपास का निर्माण कराया जाए। भले ही यह अंडरपास छोटा हो, जिससे मोटरसाइकिल और पैदल यात्री आसानी से आवागमन कर सकें, लेकिन इससे बड़ी राहत मिल सकती है।
लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं जनप्रतिनिधियों की चुप्पी को लेकर भी क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
