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गोरखपुर

गोरखपुर महोत्सव में नाथपंथ की अमर वाणी से जागा जनचेतना का दीप

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गोरखनाथ के उपदेशों ने किया भाव-विभोर

गोरखपुर महोत्सव के प्रथम दिवस गोरखपुर पुस्तक मेला के तत्वावधान में आयोजित व्यक्ति विशेष संवाद कार्यक्रम नाथपंथ की आध्यात्मिक गरिमा और साहित्यिक तेज से ओत-प्रोत रहा। इस अवसर पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आचार्य डॉ. विमलेश मिश्र एवं योगवाणी के पूर्व संपादक डॉ. फूलचंद्र प्रसाद गुप्त के सारगर्भित उद्बोधनों ने श्रोताओं को गहरे भावलोक में पहुंचा दिया।

वक्ताओं ने योगगुरु गोरखनाथ के उन उपदेशों को वर्तमान साहित्य और समाज के संदर्भ में प्रस्तुत किया, जो आज भी आम जनमानस के जीवन को दिशा देने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि नाथपंथ केवल साधना का मार्ग नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों को दूर कर सदाचार, योग और कर्म के माध्यम से मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देता है।

गुरु गोरखनाथ द्वारा रचित साहित्य की संधा भाषा—जिसमें भोजपुरी, राजस्थानी और पंजाबी का अद्भुत समन्वय है—पर विस्तार से चर्चा हुई। सबदी, हठयोग और उलटबांसी जैसे प्रतीकात्मक साहित्यिक रूपों के माध्यम से आध्यात्मिक, शारीरिक और मानसिक शुद्धि का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। शिवावतारी गुरु गोरखनाथ और उनके गुरु मत्स्येंद्रनाथ की तपस्वी यात्रा तथा उससे उपजे साहित्यिक सृजन ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि गोरखनाथ की गोरखवाणी से प्रेरित होकर कबीरदास जैसे महान संतों ने सामाजिक चेतना को नई धार दी। श्रोताओं के प्रश्नों पर हुए संवाद ने कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया।

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कार्यक्रम का संचालन सुधीर कुमार मिश्रा ने किया तथा विषय प्रतिपादन डॉ. दीनबंधु शुक्ल ने किया। इस अवसर पर उमेशचंद्र शुक्ल, युगेश शुक्ल, शशिकांत तिवारी, पुष्पेंद्र सिंह, संतोष राव, संजय चौरसिया, डॉ. कमलेश गौड़, सूरज गुप्ता, पवन तिवारी, डॉ. अनिल गुप्ता, अरुण पांडेय, नितेश राय, प्रभात त्रिपाठी, आलोक राय, आलोक दूबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी दर्शक और श्रोता उपस्थित रहे।

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