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वाराणसी

गंगा पर नए रेल-रोड ब्रिज के लिए कंपनी चयनित, जल्द शुरू होगी निर्माण प्रक्रिया

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वाराणसी। गंगा नदी पर प्रस्तावित नए रेल-रोड ब्रिज परियोजना के लिए अंततः कंपनी का चयन कर लिया गया है। इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को RVNL-GPT JV की साझा बोली के माध्यम से मंजूरी मिली है, जिसके साथ ही निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसके पूरा होने पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से बनारस के बीच रेल संचालन में आ रही बाधाएं दूर होंगी और आउटर पर ट्रेनों को रोककर पास देने की मजबूरी खत्म हो जाएगी।

दरअसल, मई 2023 में काशी रेलवे स्टेशन के डिजाइन को स्वीकृति मिली थी। इसके बाद जुलाई 2023 में गंगा ब्रिज पर छह लेन सड़क और चार रेलवे ट्रैक के डिजाइन को मंजूरी दी गई। मार्च 2024 में आईआईटी रुड़की और बीएचयू के इंजीनियरों ने सुरक्षा संबंधी एनओसी प्रदान की, जबकि जून 2024 में पुरातत्व विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिला। इसके बाद से कंपनी चयन की प्रक्रिया चल रही थी, जो जनवरी 2026 में पूरी हो गई है।

नया रेल-कम-रोड ब्रिज नंबर 11 काशी रेलवे स्टेशन के पास स्थित मौजूदा मालवीय ब्रिज के निकट बनाया जाएगा। यह पुल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ ट्रैफिक दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। परियोजना के तहत ब्रिज के सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर दोनों का डिजाइन और निर्माण किया जाएगा। इसमें 108.5 मीटर के आठ स्पैन और 103.3 मीटर के दो स्पैन होंगे, जिन्हें ओपन वेब स्टील गर्डर तकनीक से तैयार किया जाएगा।

ब्रिज के निचले डेक पर चार रेलवे ट्रैक और ऊपरी डेक पर छह लेन की सड़क बनाई जाएगी। इसके साथ रेलवे और रोड के एप्रोच भी पहले से मंजूर जनरल अरेंजमेंट ड्रॉइंग के अनुरूप विकसित किए जाएंगे। परियोजना में ब्रिज निर्माण के साथ ओवरहेड इक्विपमेंट और जनरल इलेक्ट्रिकल वर्क भी शामिल हैं। ये सभी कार्य नॉर्दर्न रेलवे के लखनऊ डिवीजन के अंतर्गत होंगे। परियोजना की कुल लागत 1,201.36 करोड़ रुपये तय की गई है, जिसमें सभी प्रकार के कर शामिल हैं। जॉइंट वेंचर के तहत Rail Vikas Nigam Ltd की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत और GPT Infra Projects Ltd की 40 प्रतिशत रहेगी।

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नए गंगा ब्रिज और काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद क्षेत्र में आर्थिक प्रगति की उम्मीदें बढ़ गई हैं। मालवीय ब्रिज रेल और सड़क परिवहन के बीच तरक्की का मजबूत सेतु बनेगा, जिससे उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार तक आवागमन सुगम होगा।

रेल प्रशासन ने 21 जून 2024 को इस करोड़ों रुपये की अनुमानित लागत वाली परियोजना के लिए पुरातत्व विभाग से एनओसी प्राप्त कर फाइल कैबिनेट को भेजी थी। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट ने वाराणसी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जिसमें गंगा नदी पर यह महत्वपूर्ण रेल-रोड ब्रिज भी शामिल है। परिवहन क्षमता के लिहाज से यह देश के सबसे बड़े पुलों में से एक होगा, जिसकी प्रमुख विशेषता रेल लाइन के ऊपर छह लेन का फ्लाईओवर है।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया था कि पूरे प्रोजेक्ट पर 2,642 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत वाराणसी और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बीच तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मल्टी ट्रैकिंग प्रोजेक्ट भीड़भाड़ कम करने के साथ परिवहन व्यवस्था को नई गति देगा।

करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल पूर्वांचल की तरक्की का भी आधार बनेगा। मालवीय ब्रिज के जर्जर होने के कारण हावड़ा–नई दिल्ली रेलखंड से पूर्वांचल का संपर्क प्रभावित हो रहा था। नए ब्रिज पर चार रेल ट्रैक होने से यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का संचालन भी एक साथ संभव होगा, जिससे नए रेल मार्गों की शुरुआत और माल ढुलाई में तेजी आएगी।

नए ब्रिज पर ट्रेनों की अधिकतम गति 112 किमी प्रति घंटा होगी, जबकि मौजूदा जर्जर पुल पर ट्रेनों की रफ्तार 25 से 30 किमी प्रति घंटा तक सीमित है। इससे डीडीयू से वाराणसी की यात्रा का समय घटकर लगभग 30 मिनट रह जाएगा। नए ब्रिज पर दो के बजाय चार रेलवे ट्रैक व्यासनगर तक बिछाए जाएंगे, जिससे मालगाड़ियों की रफ्तार और कारोबार दोनों में इजाफा होगा।

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चंदौली से वाराणसी आने-जाने के लिए अभी तक मालवीय पुल ही एकमात्र मार्ग है। पुल के जर्जर होने के कारण करीब डेढ़ दशक पहले बड़े वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था। छोटे वाहनों के लिए 15 किमी की दूरी का किराया 50 रुपये है, जबकि बस संचालन शुरू होने पर यह 20 रुपये तक सिमटने की संभावना है। अनुमान है कि प्रतिदिन लगभग 50 हजार लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं, जबकि वर्तमान में बसें केवल पड़ाव तक ही संचालित हो पा रही हैं।

नए मालवीय पुल की कुल लंबाई 1074 मीटर होगी और इसमें आठ पिलर होंगे। काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास वर्ष 2050 की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा। गंगा ब्रिज को कैबिनेट की मंजूरी में देरी के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था। रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत डिजाइन के अनुसार काशी स्टेशन को राष्ट्रीय राजमार्ग 44 से जोड़ा जाएगा, जहां दो एंट्री प्वाइंट, अंडरग्राउंड चार प्लेटफार्म, प्रथम तल पर यात्रियों के ठहरने की सुविधा, टिकट काउंटर, फूड प्लाजा और रिटायरिंग रूम जैसी व्यवस्थाएं होंगी। नए काशी रेलवे स्टेशन पर करीब 10 हजार यात्रियों के बैठने की क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे भविष्य में यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

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