वाराणसी
काशी में सांसद संस्कृत प्रतियोगिता-2025 का भव्य समापन, 52 छात्रों को मिले पुरस्कार
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम स्थित त्रयम्बकेश्वर सभागार में सांसद संस्कृत प्रतियोगिता- 2025 का समापन हुआ। यह दो दिवसीय कार्यक्रम 7-8 जनवरी 2025 तक आयोजित हुआ था। समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व धर्मार्थ मंत्री और शहर दक्षिणी के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. प्रीति विमर्शिनी, प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी, प्रो. ब्रजभूषण ओझा, पूर्व न्यासी पं. वेंकट रमण घनपाठी और श्री शम्भू शरण भी मंच पर मौजूद थे।समापन सत्र के दौरान डॉ. नीलकंठ तिवारी ने संस्कृत प्रतियोगिता की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि जबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि काशी पर पड़ी है तबसे काशी निरंतर विकास के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने संस्कृत शास्त्रों के उन्नयन के लिए काशी के विद्वानों और छात्रों को कई अवसर प्रदान किए हैं।

इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत की प्राचीनता और मानवता के गुणों की चर्चा की। डॉ. तिवारी ने काशी के गुरुकुलों में शास्त्र चर्चा की सराहना की और कहा कि संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा है जिसमें ऋग्वेद का पहला मंत्र भी बोला गया।समापन सत्र में डॉ. प्रीति विमर्शिनी ने वेदों के महत्व को समझाया और कहा कि वेदों का ज्ञान पूरी मानवता के कल्याण के लिए आवश्यक है।
इसके साथ ही प्रो. दिनेश कुमार गर्ग ने संस्कृत प्रतियोगिता की सराहना की और संस्कृत पर रचित काव्य पाठ किया। प्रो. धर्मदत्त चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशिष्ट कार्यों पर एक भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की।
आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. ब्रजभूषण ओझा ने कार्यक्रम की सफलता के लिए बाबा विश्वनाथ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और माननीय मोदी जी का धन्यवाद किया।इस समापन समारोह में डॉ. नीलकंठ तिवारी ने विजेता प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और सम्मान राशि प्रदान की।
कार्यक्रम में लगभग 300 विद्वान उपस्थित थे और कुल 52 छात्रों को पुरस्कार से नवाजा गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सिद्धिदात्री भरद्वाज और डॉ. आनंद कुमार जैन ने किया।
