शिक्षा
आरटीई में चयनित बच्चों को प्रवेश न मिलने पर सख्ती, डीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
वाराणसी। जनपद में ‘शिक्षा का अधिकार’ (आरटीई) के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। तीन चरणों में लॉटरी प्रक्रिया के जरिए कुल 8625 बच्चों का चयन किया गया, लेकिन इनमें से महज करीब 2000 बच्चों को ही अब तक स्कूलों में दाखिला मिल सका है। शेष बच्चों के अभिभावक लगातार विद्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि कई विद्यालय कागजी प्रक्रिया का हवाला देकर प्रवेश टाल रहे हैं, जबकि कुछ स्कूल सीधे एडमिशन बंद होने की बात कहकर बच्चों को वापस कर दे रहे हैं। इस स्थिति को लेकर शिकायतें अब जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तक पहुंचने लगी हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने जनपद के सभी गैर सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि चयनित छात्र-छात्राओं को प्रवेश देने से इंकार करने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिले के अधिकांश विद्यालयों में कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन आरटीई के तहत चयनित कई बच्चों का अब तक नामांकन नहीं हो सका है। इस पर जिलाधिकारी ने प्राप्त शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव को जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12 (1) (ग) के अंतर्गत चयनित बच्चों के प्रवेश से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ विद्यालयों द्वारा प्रवेश से इंकार करना, अभिभावकों से अनावश्यक या अवैध शुल्क की मांग करना, अप्रासंगिक दस्तावेज़ मांगना और अभिभावकों को परेशान करना अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।
जिलाधिकारी द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी विद्यालय के खिलाफ इस प्रकार की शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित संस्थान पर अधिनियम की धारा 13 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ऐसे विद्यालयों को शुल्क प्रतिपूर्ति भी नहीं दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, शासन के 8 जनवरी 2026 के पत्र में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सभी विद्यालयों के लिए अनिवार्य बताया गया है। इसके बावजूद यदि किसी स्कूल के खिलाफ प्रवेश न देने की शिकायत मिलती है, तो उसकी मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय की होगी।
