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गोरखपुर

आस्था का अनूठा केंद्र नीलकंठ महादेव मंदिर: जहाँ पूरी होती हैं मुरादें

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पर्यावरण संरक्षण की भी दी जा रही मिसाल

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर, उनवल श्रद्धालुओं के लिए केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गहरी आस्था, विश्वास और प्रकृति संरक्षण का जीवंत प्रतीक बन चुका है। गोरखपुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर नगर पंचायत उनवल में स्थित यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र रहा है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर यह मंदिर स्थित है, वह क्षेत्र पहले घने जंगल से आच्छादित था। बताया जाता है कि यहां दो सर्पों का एक साथ दिखना भगवान शिव की उपस्थिति का संकेत माना गया, जिसके बाद ग्रामीणों में इस स्थल के प्रति गहरी श्रद्धा उत्पन्न हुई। इसी विश्वास के आधार पर कोलकाता से आए कारीगरों द्वारा भव्य शिवालय का निर्माण कराया गया।

मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फलित होती है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है।

धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह मंदिर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक नई मिसाल पेश कर रहा है। मंदिर परिसर और आसपास पीपल, बरगद, बेल जैसे धार्मिक एवं औषधीय महत्व वाले वृक्षों का रोपण किया गया है। इससे न केवल हरियाली बढ़ी है, बल्कि भक्तों को स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक छाया भी प्राप्त हो रही है।

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नीलकंठ महादेव मंदिर आज आस्था, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का ऐसा संगम बन चुका है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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