गोरखपुर
इलाहाबाद हाईकोर्ट परिक्षेत्र में अधिवक्ताओं की उम्मीद बने बलवंत शाही
क्रम संख्या 76 को मिल रहा ऐतिहासिक जनसमर्थन
गोरखपुर। इलाहाबाद हाईकोर्ट परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के समस्त जिलों में इस समय एक ही चर्चा है—अधिवक्ता हितों की सशक्त आवाज, ईमानदार नेतृत्व और संघर्षशील व्यक्तित्व के रूप में उभरते हुए बलवंत शाही एडवोकेट। बार काउंसिल सदस्य पद के लिए मैदान में उतरे बलवंत शाही का कारवां अब केवल एक चुनावी यात्रा नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज के सम्मान, अधिकार और भविष्य की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, फतेहपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, आज़मगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, अयोध्या, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, जालौन, झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट सहित बार काउंसिल के प्रत्येक जिले में अधिवक्ता एक स्वर में कह रहे हैं—“इस बार वोट अधिकार और स्वाभिमान के लिए, इस बार वोट क्रम संख्या 76 के लिए।”

इसी क्रम में बुलन्दशहर अधिवक्ता समाज के लिए एक ऐतिहासिक केंद्र बनकर उभरा, जहाँ अधिवक्ताओं का भावनात्मक समर्थन देखते ही बनता था। न्यायालय परिसरों में जिस आत्मीयता, विश्वास और उत्साह के साथ बलवंत शाही का स्वागत हुआ, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि यह समर्थन केवल औपचारिक नहीं, बल्कि वर्षों से दबे सवालों और अपेक्षाओं की सामूहिक आवाज है।

अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए बलवंत शाही ने अपने 15 सूत्रीय अधिवक्ता हित कार्यक्रम को सामने रखा, जिसमें अधिवक्ता सुरक्षा कानून, चैंबर सुविधा, चिकित्सा बीमा, युवा अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक संरक्षण, वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सम्मान, महिला अधिवक्ताओं की सुरक्षा और बार-बेंच के बीच संतुलन जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई। उनके शब्दों में न कोई बनावट थी, न कोई राजनीतिक छल—बस एक अधिवक्ता की पीड़ा और समाधान का संकल्प था।

इसी कारण जब अधिवक्ताओं ने यह संकल्प लिया कि मतपत्र में क्रम संख्या 76 के सामने प्रथम वरीयता (1) दी जाएगी, तो वह केवल एक वादा नहीं बल्कि एक आंदोलन बन गया। हर्षध्वनि, तालियों और भावुक नारों के बीच यह स्पष्ट हो गया कि बलवंत शाही अब एक नाम नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज की आशा बन चुके हैं।

बुलन्दशहर के साथ-साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट परिक्षेत्र के अन्य जिलों से भी निरंतर समर्थन की लहर उमड़ रही है। युवा अधिवक्ता उन्हें अपना भविष्य मान रहे हैं, वरिष्ठ अधिवक्ता उन्हें अनुभव और संतुलन का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं महिला अधिवक्ता उनके कार्यक्रम को सुरक्षा और सम्मान की गारंटी के रूप में देख रही हैं।
बलवंत शाही का व्यक्तित्व सादगी, संघर्ष और सेवा का संगम है। पूर्व मंत्री, सिविल कोर्ट गोरखपुर के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी अधिवक्ता याद करते हैं, जब बिना भेदभाव हर वर्ग की बात सुनी गई। यही कारण है कि आज इलाहाबाद हाईकोर्ट परिक्षेत्र से लेकर अंतिम तहसील तक उनका नाम विश्वास के साथ लिया जा रहा है।

चुनावी माहौल अब स्पष्ट संकेत दे रहा है कि यह चुनाव केवल संख्या का नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और अधिवक्ता स्वाभिमान की विजय का चुनाव है। जिस तरह अपार जनसमर्थन बलवंत शाही के पक्ष में एकजुट हो रहा है, उससे यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि विजयश्री स्वयं उनके मार्ग की प्रतीक्षा कर रही है।
अधिवक्ता समाज का संदेश साफ है “जो हमारे साथ खड़ा रहा, वही हमें आगे ले जाएगा।” और उस विश्वास का नाम है—बलवंत शाही एडवोकेट, क्रम संख्या 76।
