चन्दौली
धानापुर के किसानों में निःशुल्क सूर्यमुखी बीज वितरित
धानापुर (चंदौली)। कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) चंदौली के सहयोग से ग्रामसभा बुद्धपुर व बरहन में एक महत्वपूर्ण कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत सूर्यमुखी फसल का निःशुल्क बीज वितरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन शिवनंदम फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, खड़ान धानापुर के तत्वावधान में किया गया, जिसमें एफ.पी.ओ. के निदेशक रमेश सिंह ने बीज का वितरण किया।
रमेश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा कुल 70 किलोग्राम सूर्यमुखी बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया, जिसे 40 किसानों में वितरित किया गया। इस बीज का उपयोग लगभग 35 एकड़ भूमि में सूर्यमुखी की खेती के लिए किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बीज कुछ विलंब से प्राप्त हुआ, लेकिन यदि आगामी वर्ष 15 मार्च तक बीज उपलब्ध हो जाए, तो इस फसल को बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है।
सिर्फ 85 दिन में तैयार होती है फसल
निदेशक श्री सिंह ने बताया कि सूर्यमुखी एक तिलहनी फसल है, जो मात्र 85 दिनों में तैयार हो जाती है। इसके पौधे को पशु नुकसान नहीं पहुंचाते, और इससे प्राप्त तेल हृदय, यकृत (लीवर), और गुर्दे (किडनी) के लिए अत्यंत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाला रिफाइंड तेल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, जबकि सूर्यमुखी का तेल एक तरह से औषधि समान है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि चना, मटर और सरसों की कटाई के बाद खाली खेतों में सूर्यमुखी की खेती अवश्य करें। उन्होंने विश्वास जताया कि जब यह फसल बड़े क्षेत्र में बोई जाएगी, तो पक्षियों द्वारा होने वाला नुकसान भी कम हो जाएगा।
केवीके चंदौली से पहली बार मिली है सीधी सहायता
रमेश सिंह ने कहा कि जब से केवीके चंदौली की स्थापना हुई है, यह पहली बार है जब विकासखंड धानापुर के किसानों को किसी योजना का सीधा और वास्तविक लाभ मिला है। इससे पहले जो भी योजनाएं आती थीं, वे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती थीं। लेकिन इस बार निःशुल्क बीज वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है।
उन्होंने केवीके के वैज्ञानिक नरेंद्र रघुवंशी की सराहना करते हुए कहा कि उनके आने से जनपद के सभी एफ.पी.ओ. संचालकों को उम्मीद की नई किरण नजर आई है।
ढ़ैचा की खेती को लेकर भी किया गया जागरूक
रमेश सिंह ने किसानों को ढ़ैचा (हरी खाद) की खेती के प्रति भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि ढ़ैचा का बीज बाजार में नहीं बनता, बल्कि इसे किसानों को स्वयं उपजाना होता है। यह मृदा उर्वरता के लिए बेहद जरूरी है।
इस मौके पर श्रीकृष्ण सिंह, राजवंश सिंह, विवेक सिंह, नगीना यादव, हरेंद्र प्रताप, रामगोपाल, सियाराम यादव, धनन्जय यादव, जगनरायण पाल सहित कई किसान उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और सूर्यमुखी की खेती को अपनाने का संकल्प लिया।
