पूर्वांचल
66 बिसवा पोखरी पर मंडी समिति का अतिक्रमण, प्रशासन मौन
शिकायतों और जांच के बावजूद कार्रवाई अधर में
मऊ। योगी सरकार जहां जलाशयों और पोखरों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं मऊ जिले की घोसी तहसील के गोंठा बाजार में स्थित मंडी समिति पर इन आदेशों का कोई खौफ नहीं दिखता। मंडी समिति ने 66 बिसवा पोखरी पर कब्जा करते हुए उसे चारदीवारी से घेर दिया है और मिट्टी भरकर पोखरी के अस्तित्व को खत्म कर दिया है। इस मामले को लेकर प्रवीण राय ने जुलाई 2024 में आईजीआरएस पोर्टल और जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।

जांच में घोसी तहसील के अधिकारियों ने पुष्टि की कि गाटा संख्या 932 पोखरी की भूमि है जिसे मंडी समिति ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इसके बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
धार्मिक भावनाएं आहत, जनता में आक्रोशप्रवीण राय का कहना है कि यह पोखरी छठ पूजा और जीवित्पुत्रिका व्रत जैसे धार्मिक आयोजनों का केंद्र रही है। इसके अलावा रामलीला मंचन के दौरान भी इस पोखरी का धार्मिक महत्व है। पोखरी पर कब्जे के कारण हिंदू समुदाय में गहरी नाराजगी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखीप्रवीण राय ने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के हिंचलाल तिवारी बनाम यूपी स्टेट केस में दिए गए निर्देशों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जलाशयों और पोखरों का संरक्षण करना अनिवार्य है। इसके बावजूद प्रशासन की उदासीनता सवाल खड़े करती है।
शिकायत और जांच का चक्र जारी 3 जुलाई 2024 को जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज होने के बाद तत्कालीन तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने टीम गठित कर जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में पोखरी पर अवैध कब्जे की पुष्टि भी हुई लेकिन तहसीलदार के तबादले के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
16 नवंबर 2024 को तहसील समाधान दिवस पर प्रवीण राय ने पुनः जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र को शिकायती पत्र सौंपा। जिलाधिकारी ने नवागत तहसीलदार शैलेंद्र कुमार सिंह को कार्रवाई के निर्देश दिए। तहसीलदार ने जांच की बात कही लेकिन जनता प्रशासन के रवैये से नाखुश है। घोसी के तहसीलदार शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि “तहसील दिवस पर इस मामले की जानकारी हुई है। जांच चल रही है इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।”
