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वाराणसी

सरल बनने की की कला सिखाता है उत्तम आर्जव धर्म

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वाराणसी। छल कपट के कारण आदमी सोचता कुछ और है, कहता कुछ और है, करता कुछ और है। सुख और शांति कहीं बाहर नहीं, अपने ही अंदर है । सरल बनाने की कला सिखाता है “उत्तम आर्जव धर्म “।
उक्त बातें श्री दिगंबर जैन समाज काशी के तत्वावधान में चल रहे पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को भगवान पार्श्वनाथ जी की जन्म स्थली भेलूपुर में सायं काल ब्रह्मचारी आकाश जी ने कही उन्होंने तृतीय अध्याय उत्तम आर्जव धर्म पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आर्जव का अर्थ है भाव की शुद्धता है , जो सोचना सो कहना और जो कहना सो करना। हमेशा सरलता को अपनाकर जिंदगी को खुशहाल एवं मैत्रीपूर्ण बनाना चाहिए। आर्जव धर्म उज्जवल इता एवं सहिष्णुता की जननी है । अच्छे कर्म करते रहिए परिणाम सामने अवश्य आएगा उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व को जैन भाषा में परवा धीराज अथवा महापर्व भी कहा गया है इस कारण इस पर्व की अध्यात्म मुखी की दृष्टि है।
ग्वाल दास साहू लेने स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में प्रातः विविध धार्मिक कृत्य प्रारंभ हुए। प्रारंभ में योग, ध्यान , सामाजिक , मंत्र जाप के साथ भगवंती का जलाभिषेक किया गया। सारनाथ स्थित 11 वे तीर्थंकर की जन्मस्थली पर शुक्रवार को भगवान श्रेयांसनाथ जी की 11 फुट ऊंची पद्मासन प्रतिमा का भक्तों द्वारा पूजन पाठ एवं पंचाभिषेक किया गया। नरिया ,खोजवा ,भदानी ,मैदागिन , चंद्रपुरी स्थित मंदिरों में भी विविध धार्मिक अनुष्ठान किए गए।
भेलूपुर एवं वलदास शाओलिन स्थित जैन मंदिरों में चल रहे 10 लक्षण विधान के तीसरे दिन मारने पर भी फल अर्पित कर पूजन पाठ किया गया।
सायंकाल सभी अन्य जैन मंदिरों में भगवंतो की आरती ,शास्त्र प्रवचन ,जिनवाणी पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए।
आयोजन में प्रमुख रूप से दीपक जैन, राजेश जैन ,सौमित्र जैन ,जीवन जैन ,राजेश भूषण जैन ,रतन जैन संजय गर्ग ,पंडित अशोक जैन ,प्रोफ़ेसर कमलेश कुमार जैन आदि उपस्थित थे।

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