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वाराणसी

श्रीमद भागवत कथा रस महोत्सव के पांचवें दिन श्रीकृष्ण लीलाओं पर हुआ भावपूर्ण प्रवचन

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय के महामंडल लहुराबीर आवास पर चल रहे श्रीमद भागवत कथा रस महोत्सव के पांचवें दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता की अनुपम छटा बिखरी। इस पावन अवसर पर वृंदावन से पधारे कथा व्यास श्री अभिराम दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं पर दिव्य प्रवचन दिया।

महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार, बाल लीलाएँ, माखन चोरी, बकासुर वध, वेणुगीत, छप्पन महाभोग एवं गोवर्धन पूजा जैसे पवित्र प्रसंगों का विशद वर्णन किया।

भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार का दिव्य महत्व समझाते हुए उन्होंने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ, तब उनका नामकरण नंद बाबा और यशोदा माता ने किया। “कृष्ण” शब्द का अर्थ है “जो सर्वत्र आकर्षण करता है”। उन्होंने बताया कि भगवान का नाम उच्चारण मात्र से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।

भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला केवल एक शरारत नहीं थी, बल्कि उनके अनन्य भक्तों के प्रति प्रेम का प्रतीक थी। यह लीला दर्शाती है कि जब भक्त निश्छल प्रेम और भक्ति के भाव से भगवान को समर्पित होता है, तो स्वयं कृष्ण उसकी भक्ति को स्वीकार करते हैं।

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श्रीकृष्ण द्वारा बकासुर वध की कथा सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि बकासुर राक्षस ने गोकुलवासियों को आतंकित किया था, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अलौकिक शक्ति से उसका उद्धार किया। यह प्रसंग हमें यह सिखाता है कि भगवान सदा अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण की वेणुगीत का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण बांसुरी बजाते थे, तो उसकी मधुर ध्वनि समस्त जीवों को मोह लेती थी। बांसुरी की धुन केवल संगीत नहीं, बल्कि भक्ति और प्रेम का माध्यम थी, जो हर जीव को भगवान के प्रति आकर्षित करती थी।

भगवान श्रीकृष्ण की छप्पन महाभोग लीला का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जब इंद्रदेव ने गोकुल पर मूसलधार वर्षा भेजी, तब भगवान ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर अपने भक्तों की रक्षा की। बाद में, भक्तों ने प्रेमपूर्वक छप्पन भोग अर्पित कर उनकी कृपा का धन्यवाद किया। यह प्रसंग निश्छल प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

गोवर्धन पूजा का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह हमें यह सिखाती है कि जब भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान की शरण में आता है, तो स्वयं श्रीकृष्ण उसकी हर विपत्ति से रक्षा करते हैं। गोवर्धन पूजा आत्मसमर्पण, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है।

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इस पावन अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता, समाजसेवी, संतजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा में उपस्थित भक्तों ने भावविभोर होकर श्रीकृष्ण लीलाओं का रसपान किया।

श्रीमद भागवत कथा रस महोत्सव का यह सप्ताह व्यापी अनुष्ठान निरंतर जारी रहेगा, जिसमें कथा व्यास श्री अभिराम दास जी महाराज प्रतिदिन नए प्रसंगों पर प्रवचन देंगे। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर इस पावन कथा महोत्सव का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

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