Connect with us

गाजीपुर

शिल्प और सृजन का महापर्व है विश्वकर्मा पूजा

Published

on

Loading...
Loading...

बहरियाबाद (गाजीपुर)। जिले के बहरियाबाद और आस-पास के क्षेत्रों के गांवों में विश्वकर्मा पूजा मनाने के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। विश्वकर्मा पूजा, जिसे विश्वकर्मा जयंती भी कहते हैं, शिल्प और वास्तुकला के देवता भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। यह हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है। इस दिन कारीगर, इंजीनियर, मज़दूर और औद्योगिक श्रमिक खास तौर पर पूजा करते हैं। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, उन्होंने देवी-देवताओं के लिए कई महत्वपूर्ण भवनों और हथियारों का निर्माण किया था। जैसे: सोने की लंका – रामायण में वर्णित सोने की लंका का निर्माण उन्होंने ही किया था। द्वारका नगरी – भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका भी उन्हीं के द्वारा निर्मित है। इंद्रप्रस्थ और हस्तिनापुर – महाभारत काल में ये दोनों नगर भी उन्हीं की अद्भुत रचनाएँ मानी जाती हैं। हथियार – भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और भगवान शिव का त्रिशूल भी उन्होंने ही बनाया था।

विश्वकर्मा पूजा का मुख्य उद्देश्य अपने औजारों और मशीनों के प्रति सम्मान प्रकट करना है। कारीगर और मज़दूर इस दिन अपने काम के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और भगवान से अपने काम में सफलता और सुरक्षा का आशीर्वाद माँगते हैं।

इस दिन कारखाने, वर्कशॉप और औद्योगिक इकाइयाँ बंद रहती हैं। लोग अपने औजारों, मशीनों और उपकरणों को साफ करते हैं, उन पर तिलक और फूल चढ़ाते हैं और पूजा करते हैं। इस दिन नए काम की शुरुआत करना और मशीनों की खरीदारी करना भी शुभ माना जाता है।

Advertisement

विश्वकर्मा पूजा न केवल एक बहुत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह कार्यक्रम श्रमिकों के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। ऐसा माना जाता है कि विश्वकर्मा जी की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है और कार्य में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं। यह त्योहार न केवल पारंपरिक कारीगरों द्वारा, बल्कि इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा भी मनाया जाता है, जो इसे मानव रचनात्मकता और नवाचार के सम्मान के रूप में देखते हैं।

यह पर्व हमें सिखाता है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, और हर कारीगर या शिल्पकार का सम्मान करना चाहिए। यह सृजन, मेहनत और समर्पण का प्रतीक है।

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page