अपराध
विधानभवन के सामने आत्मदाह करने पहुंचा परिवार
दबंगों पर पुलिस कार्रवाई न होने से आहत पूरा परिवार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानभवन के बाहर गुरुवार को आत्मदाह की कोशिश करने के लिए पीलीभीत से आए एक परिवार के पांच सदस्यों को पुलिस ने रोक लिया। समय पर हस्तक्षेप करते हुए पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लेकर हजरतगंज थाने पहुंचाया। परिवार ने आरोप लगाया कि पीलीभीत पुलिस उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रही है।
हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि पूछताछ में जोगीठेर, पीसलपुर निवासी कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या कर उसे फंदे से लटकाया गया था। जब उन्होंने इस घटना की शिकायत पीसलपुर थाने में की तो पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस असहाय स्थिति में कृष्ण कुमार अपनी पत्नी माया देवी, बेटे पंकज और प्रमोद तथा बेटी स्वाति के साथ विधानभवन के सामने आत्मदाह करने पहुंचे। विधानभवन के पास तैनात पुलिसकर्मियों ने उनके संदिग्ध व्यवहार पर ध्यान देते हुए उन्हें रोका। उनके पास से दो लीटर पेट्रोल भी बरामद किया गया। फिलहाल पुलिस उनसे आगे की पूछताछ कर रही है।
3 दिन थाने में रखने के बाद मिला शव –
पीलीभीत के बीसलपुर के जोगीठेर गांव के एक परिवार का मुखिया अपनी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी के साथ विधानसभा के सामने आत्मदाह करने पहुंचा था। उन्हें विधान भवन के बाहर तैनात सुरक्षा कर्मियों पंचराम यादव, शत्रुजीत राय और सुधा सिंह ने समय पर रोक लिया।
उनके पास से मिले प्रार्थना पत्र में लिखा था कि, गांव के विपिन और अरुण राणा ने परिवार को लगातार परेशान किया है, जिसकी वजह से उनके बेटे की मौत हुई। पीड़ित परिवार के अनुसार, विपिन और अरुण राणा ने घर में घुसकर मारपीट की थी, जिसकी शिकायत बीसलपुर थाने में की गई थी।
इसके बाद, उन लोगों ने फिर से घर में घुसकर मारपीट की और बहन के कपड़े उतारकर उसे अपमानित किया। विरोध करने पर उन्होंने बहन के सिर पर चाकू मार दिया, जिससे उसका सिर फट गया। इसके बाद, उन्होंने दोनों भाइयों को पीटते हुए थाने ले जाकर बंद करा दिया।
परिवार का आरोप है कि 8 सितंबर को यह घटना हुई, और आरोपियों ने थाने में शिकायत वापस लेने का दबाव डाला, साथ ही पैसे की मांग की। पैसे न देने पर, 10 सितंबर को पता चला कि भाइयों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। अगले दिन बड़े भाई का शव रेलवे ट्रैक पर मिला। इसके बाद भी पुलिस और अधिकारियों से शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
