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वाराणसी

वाराणसी कोर्ट-कलेक्ट्रेट में सीरियल ब्लास्ट को 17 साल पूरे, सुरक्षा अब भी भगवान भरोसे

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वाराणसी कोर्ट और कलेक्ट्रेट परिसर में हुए सीरियल ब्लास्ट को आज 17 साल हो गए। इस आतंकी हमले में तीन वकीलों समेत 9 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक घायल हुए थे। इतने वर्षों बाद भी घायलों को न कोई सहायता मिली और न ही कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया। तत्कालीन क्षेत्राधिकारी ने सुरक्षा प्लान बनाकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी लेकिन वह फाइल आज भी अनदेखी पड़ी है।

एडवोकेट वशिष्ठ नारायण मिश्र जो इस हमले के पीड़ितों में शामिल हैं आज भी अपनी कनपटी में धंसे छर्रों के दर्द के साथ जी रहे हैं। ब्लास्ट में उनके तीन अधिवक्ता साथी मारे गए थे। वशिष्ठ नारायण अब ठीक से खड़े नहीं हो पाते और छड़ी के सहारे चलने को मजबूर हैं।

उनका कहना है कि इलाज में लाखों रुपए खर्च हो गए लेकिन सरकार से कोई मदद नहीं मिली। हर साल बरसी पर कुछ साथी मदद कर देते हैं जिससे थोड़ी राहत मिलती है।

घटना के वक्त लोग समझ रहे थे कि माफिया मुख्तार अंसारी ने अजय राय पर हमला कराया है। लेकिन जब लखनऊ और अयोध्या में भी ब्लास्ट हुए तब यह स्पष्ट हुआ कि यह आतंकी हमला था।

2006 में संकटमोचन मंदिर और कैंट स्टेशन पर हुए ब्लास्ट के आरोपी वलीउल्लाह की गिरफ्तारी के बाद आतंकी संगठनों ने बदला लेने के लिए कचहरी ब्लास्ट की साजिश रची थी।

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वाराणसी, लखनऊ और अयोध्या में हुए इन सीरियल ब्लास्ट में आतंकियों ने कचहरी परिसर की ढुलमुल सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाया। बिना जांच के साइकिल में टिफिन बम लगाकर प्रवेश किया गया।

आज भी कलेक्ट्रेट और कचहरी परिसर की सुरक्षा भगवान भरोसे है। कुछ गेट पर मेटल डिटेक्टर लगे हैं, लेकिन अन्य जगह बिना जांच के प्रवेश आसानी से हो सकता है। सुरक्षा के लिए लगाए गए 60 सीसीटीवी कैमरे और चार मेटल डिटेक्टर पर्याप्त नहीं हैं। बम स्क्वायड भी बस औपचारिकता निभाकर चला जाता है। इन कमजोर सुरक्षा इंतजामों के बीच वाराणसी जैसी जगह को महादेव की कृपा पर ही छोड़ दिया गया है।

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