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गोरखपुर

लोकसभा में छोटे और पारंपरिक व्यापारियों की आवाज़ बने रवि किशन

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ऑनलाइन व्यापार पर सख्त नियमों और व्यापारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की मांग की

गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने आज लोकसभा में छोटे और पारंपरिक व्यापारियों के सामने आ रही समस्याओं को गंभीरता से उठाया। नियम 370 के तहत ‘विशेष उल्लेख’ करते हुए, उन्होंने कहा कि तेज़ी से बढ़ते ऑनलाइन व्यापार क्षेत्र के कारण छोटे दुकानदारों और पारंपरिक व्यापारियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

सांसद ने कहा कि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट और आक्रामक मार्केटिंग रणनीतियों के ज़रिए बाज़ार पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं; इसका छोटे व्यापारियों की आय पर बुरा असर पड़ रहा है और कई दुकानदारों को अपना कारोबार बंद करने की कगार पर धकेल रहा है। उन्होंने आगे छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा तंत्र की कमी को भी उजागर किया, जिसे उन्होंने गहरी चिंता का विषय बताया।

सांसद रवि किशन ने सदन में सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखीं:

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1. ऑनलाइन व्यापार के लिए स्पष्ट और सख्त नियम
बड़े प्लेटफॉर्म द्वारा अत्यधिक छूट देने की प्रथा पर रोक लगाने और बाज़ार पर एकाधिकार जमाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए।

2. छोटे और पारंपरिक व्यापारियों के हितों की रक्षा
सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करें।

3. व्यापारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा ढांचा
छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों के लिए चिकित्सा बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी योजनाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

व्यापारियों की दुर्दशा पर चिंता

सांसद ने कहा कि देश भर में लाखों छोटे व्यापारी इस समय भारी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में कई परिवार कर्ज़ के बोझ तले दब जाते हैं, क्योंकि उनके पास किसी भी तरह का स्वास्थ्य या दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध नहीं होता।

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उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि छोटे व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और उनकी दुर्दशा को नज़रअंदाज़ करना अन्याय होगा। सरकार को इस दिशा में ठोस और तत्काल कदम उठाने चाहिए।

सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील

सांसद रवि किशन ने केंद्र सरकार से अपील की कि वे इस मामले पर तत्काल विचार करें और स्पष्ट नीतियां तथा नियम बनाएं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बाज़ार में संतुलित और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखना होना चाहिए, साथ ही छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी।  उन्होंने कहा कि यह मुद्दा न केवल व्यापारियों से जुड़ा है, बल्कि देश की आर्थिक संरचना और सामाजिक न्याय से भी संबंधित है।

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