गोरखपुर
रूद्रपुर में कानून का गला घोंटा गया? चौथे स्तंभ के साथ अभद्रता ने खड़ी की बड़ी संवैधानिक चुनौती
देवरिया। जनपद के रूद्रपुर क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक और लोकतंत्र की जड़ों को हिलाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक मनमानी और सत्ता के दुरुपयोग की पराकाष्ठा देखने को मिल रही है। आरोप है कि एसडीएम हरिशंकर लाल के संरक्षण में कोतवाली पुलिस ने एक निर्दोष युवक उत्कर्ष पांडेय, जो जयदेश हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के जिला संवाददाता सभा शंकर पाण्डेय के सहयोगी हैं, को बिना किसी स्पष्ट कारण के करीब 24 घंटे तक थाने में बैठाए रखा और उसका मोबाइल भी जब्त कर लिया।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि देश के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार वर्ग से जुड़े व्यक्ति के साथ इस तरह की अभद्रता स्वयं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई, जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है। यह घटना न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता को कुचलने का प्रयास है, बल्कि सत्ता के अहंकार को भी उजागर करती है।
सूत्रों के अनुसार, उत्कर्ष पांडेय को कल शाम लगभग 4 बजे रूद्रपुर कोतवाली में बुलाकर अज्ञात कारणों से रोका गया। राष्ट्रीय पत्रकार संगठन जयहिंद के राष्ट्रीय सचिव अरुण कुमार मिश्र द्वारा हस्तक्षेप के बावजूद प्रशासन ने केवल झूठे आश्वासन देकर मामले को दबाने का प्रयास किया। वहीं दरोगा कल्याण सिंह सागर का गैर-जिम्मेदाराना रवैया भी सामने आया, जिन्होंने “हल्का गश्त में होने” का बहाना बनाकर जवाबदेही से बचने की कोशिश की।
यह घटना स्पष्ट करती है कि जब कानून के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम जनता और पत्रकारों की सुरक्षा किसके भरोसे रहे? यदि इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत होगा। अब शासन को कठोर कदम उठाकर यह साबित करना होगा कि न्याय अभी जीवित है।
