गोरखपुर
मनमानी का साम्राज्य या कानून का मज़ाक? रुद्रपुर में एसडीएम की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
देवरिया। जनपद के रुद्रपुर तहसील में प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और शासन की पारदर्शिता पर सीधा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। आरोप है कि एसडीएम हरिशंकर लाल एवं आपूर्ति विभाग के लिपिक की कथित मिलीभगत से एक पत्रकार के भतीजे उत्कर्ष पांडेय के साथ न केवल मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया गया, बल्कि उसके मान-सम्मान को भी ठेस पहुंचाई गई।

घटना के अनुसार, 3600 लीटर डीजल के कथित अवैध भंडारण के मामले में स्वयं फोन कर पत्रकार सभा शंकर पाण्डेय को मौके पर बुलाया गया। उनके साथ मौजूद भतीजे उत्कर्ष पांडेय से एसडीएम और संबंधित अधिकारी द्वारा स्वयं कहकर फोटो और वीडियो बनवाया गया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए। फोटो-वीडियो बनवाने के बाद दोनों का मोबाइल जब्त कर लिया गया और उत्कर्ष पांडेय को बिना स्पष्ट कारण बताए थाने ले जाकर बैठा दिया गया।

परिजनों द्वारा लगातार पूछताछ करने पर प्रशासन की ओर से केवल झूठे आश्वासन दिए गए। पूरी रात और अगले दिन तक युवक को थाने में बैठाए रखा गया और फिर अचानक धारा 151 में चालान कर दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एसडीएम हरिशंकर लाल द्वारा 14 दिन के रिमांड पर भेज दिया गया, जो सामान्य प्रक्रिया से हटकर प्रतीत होता है।

इस कार्रवाई के बाद रुद्रपुर तहसील में वकीलों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला। अधिवक्ताओं ने एसडीएम से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि यदि हर 151 के मामले में 14 दिन की सजा का ही नियम है तो इसे लिखित रूप में दिया जाए, अन्यथा तत्काल जमानत दी जाए। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन व्यक्तिगत द्वेष या किसी विशेष सामाजिक समीकरण के आधार पर कार्य कर रहा है?

यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और आम नागरिक के अधिकारों का है। यदि ऐसे ही प्रशासनिक मनमानी जारी रही तो कानून का भय समाप्त हो जाएगा और न्याय केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा। अब देखना यह है कि शासन और मुख्यमंत्री इस गंभीर प्रकरण पर क्या संज्ञान लेते हैं, क्योंकि यहां केवल एक युवक नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख दांव पर लगी हुई है।
