गोरखपुर
बीजेपी के साथ संध्या तिवारी का समर्पण चर्चा में
संध्या तिवारी के समर्पण से बढ़ी संगठन की जनस्वीकार्यता
सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की अमिट गाथा, 45 वर्षों में जन-जन का विश्वास बनी भारतीय जनता पार्टी
गोरखपुर। भारतीय राजनीति के विराट परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी का 45 वर्षों का यह स्वर्णिम सफर केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प, समर्पण और अथक प्रयासों की एक अद्भुत और प्रेरणादायक गाथा है। 6 अप्रैल 1980 को स्थापित यह संगठन आज करोड़ों देशवासियों की आशाओं, विश्वास और आकांक्षाओं का मजबूत स्तंभ बन चुका है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” जैसे मूल मंत्र को आत्मसात कर भाजपा ने समाज के हर वर्ग के जीवन को सकारात्मक रूप से स्पर्श करने का निरंतर प्रयास किया है।
यह पार्टी केवल सत्ता की सीढ़ियाँ चढ़ने का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्र सेवा का एक पवित्र यज्ञ बनकर उभरी है, जिसमें अनगिनत कार्यकर्ताओं ने अपने त्याग, तपस्या और समर्पण की आहुति दी है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के प्रखर राष्ट्रवादी विचारों को आत्मा में बसाकर भाजपा ने ऐसी विचारधारा को जन्म दिया, जिसने देश के कोने-कोने में नवचेतना का संचार किया।
इसी कड़ी में समाजसेवी संध्या तिवारी (पत्नी अरविन्द तिवारी) का योगदान भी उल्लेखनीय रहा है, जिन्होंने संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने में अपनी सक्रिय सहभागिता और समर्पण से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयास संगठन की सेवा भावना और सामाजिक प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त बनाते हैं।
इन 45 वर्षों में भाजपा ने संघर्षों की अग्निपरीक्षा से गुजरते हुए अनेक उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी अपने मूल सिद्धांतों से विचलित नहीं हुई। यही अडिगता और निष्ठा आज भारत को वैश्विक मंच पर एक सशक्त, आत्मनिर्भर और उभरती हुई महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में सहायक बनी है। गरीबों के उत्थान, महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और किसानों की समृद्धि के लिए चलाई गई योजनाओं ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया है।
यह स्थापना दिवस केवल उत्सव का क्षण नहीं, बल्कि उन असंख्य समर्पित कार्यकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का पावन अवसर है, जिन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। यह दिन हमें यह भी स्मरण कराता है कि हमारा कर्तव्य केवल वर्तमान तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना भी है।
आज इस ऐतिहासिक अवसर पर हम सभी को एक नया संकल्प लेना होगा। संकल्प एक ऐसे भारत के निर्माण का, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिले, जहाँ विकास की रोशनी हर घर तक पहुँचे, और जहाँ राष्ट्रहित सर्वोपरि हो। आइए, हम सभी मिलकर इस गौरवशाली यात्रा को और आगे बढ़ाएँ और अपने अथक प्रयासों से भारत को विश्व के शिखर पर स्थापित करने में अपना अमूल्य योगदान दें।
