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वाराणसी

बहुत से ऐसे टैलेंटी बच्चे हैं, जो उचित मंच न मिलने के कारण अपने टैलेंट का प्रदर्शन नहीं कर पाते और एक क्षेत्र तक सीमित रह जाते हैं- जिलाधिकारी

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ऐसे बच्चों एवं लोगों को मंच देने के लिए प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में “सांसद काशी सांस्कृतिक महोत्सव” का आयोजन किया जा रहा है-एस. राजलिंगम

16 अगस्त से 18 सितंबर तक एक माह तक जनपद में आयोजित होगी “काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव”

kashisanskritikmahotsav.in वेबसाइट पर प्रतिभागी अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं

कार्यक्रम में प्रतिभाग किए जाने हेतु प्रतिभागियों की 10 वर्ष आयु वर्ग से ऊपर की तीन श्रेणियां बनाई गई है

विधाओं में “गायन” अंतर्गत शास्त्रीय गायन में ख्याल और ध्रुपद, उपशास्त्रीय गायन में ठुमरी, दादरा, चैती, झूला, होरी, टप्पा

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लोक गायन में कजरी, चैती, होरी, झूला, बिरहा, हिमालयी लोकगीत सहित अन्य प्रकार

सुगम संगीत में गीत, ग़ज़ल, भजन, देशभक्ति गीत आदि हैं

“वादन” में स्वर वाद्य अंतर्गत सितार, वायलिन, बांसुरी, शहनाई, गिटार, सारंगी, हारमोनियम, ताल वाद्य में तबला, पखावज, मृदंगम, घटम्

लोक वाद्य में दफ़ला, नगाड़ा, दुक्कड़, ढोल, ढोलक, नाल, ताशा

“नृत्य” में शास्त्रीय नृत्य अंतर्गत कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी

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लोकनृत्य में प्रचलित स्थानीय और हिमालयी लोकनृत्य

जनजातीय नृत्य में वाराणसी और आस-पास के जनजातीय नृत्य प्रमुख है

सभी कलाकार एकल प्रस्तुति के अतिरिक्त सिर्फ एक समूह प्रस्तुति में भाग ले सकते हैं

संगतकार एक से अधिक दल के साथ संगत कर सकते हैं

प्रस्तावित विधाओं के अतिरिक्त कोई अन्य प्रस्तुति मान्य नहीं होगी

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अनापेक्षित प्रस्तुतियों को निरस्त करना निर्णायक मण्डल का दायित्व होगा

निर्णायक मण्डल का निर्णय अन्तिम एवं सर्वमान्य होगा

  वाराणसी। आगामी 16 अगस्त से 18 सितंबर तक लगभग एक माह तक जनपद में आयोजित होने वाले "काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव" कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर की जा रही हैं। 
जिलाधिकारी एस. राजलिंगम ने बताया कि काशी प्रधानमंत्री जी का संसदीय क्षेत्र है, उनका मार्ग निर्देश रहता है कि यहां पर कुछ नया होता रहे। पिछले वर्ष सांसद खेल महोत्सव का आयोजन हुआ रहा। जिसमें लगभग एक लाख बच्चों ने प्रतिभाग किया था। उन्होंने बताया कि सांसद खेल महोत्सव के आयोजन का फायदा रहा कि ग्रामीण क्षेत्र में जो परिषदीय विद्यालय के बच्चे या फिर अन्य ऐसे बच्चे रहे, जिनमें अलग-अलग स्पोर्ट्स का टैलेंट छिपा रहा और किसी कारण से वह बाहर नहीं आ पा रहा था। सांसद खेल महोत्सव के माध्यम से उन्हें एक मंच पर आकर अपने टैलेंट को प्रदर्शन करने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम को ग्राम, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर आयोजित किया गया था। उन बच्चों से प्रधानमंत्री ने इंटरेक्शन भी किया था। जिलाधिकारी ने बताया कि उन्हीं के मार्गदर्शन में फिर एक बार "सांसद काशी सांस्कृतिक महोत्सव" का आयोजन 16 अगस्त से 18 सितंबर तक लगभग 1 माह किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि काशी विद्या की राजधानी रही है। सांस्कृतिक क्षेत्र के विभिन्न घराने यहां पर होने के साथ ही भारत रत्न सहित विभिन्न अवार्ड प्राप्त लोग यहां पर हैं। उन्होंने बताया कि बहुत से ऐसे टैलेंटी बच्चे हैं, जो अपने टैलेंट का प्रदर्शन नहीं कर पाते और उचित मंच न मिलने के कारण एक क्षेत्र तक सीमित रह जाते हैं। ऐसे बच्चों एवं लोगों को मंच देने के लिए प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में "सांसद काशी सांस्कृतिक महोत्सव" का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रतिभाग किए जाने हेतु प्रतिभागियों की 10 वर्ष आयु वर्ग से ऊपर की तीन श्रेणियां बनाई गई है। कार्यक्रम में प्रतिभाग किए जाने हेतु दो विकल्प हैं। जिसमें से पहला "काशी सांस्कृतिक महोत्सव डॉट इन" पर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा तथा दूसरा विद्यालयों एवं कालेजों पढ़ने वाले बच्चों का रजिस्ट्रेशन के लिए वहाँ टीचरों को इसके लिए नोडल बनाया गया हैं। कार्यक्रम में प्रतिभाग किए जाने हेतु बाहर के लोग भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। "काशी सांस्कृतिक महोत्सव डॉट इन" वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किए जाने हेतु एक सिंपल फार्म भरना होगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले सभी बच्चों को सर्टिफिकेट भी मिलेगा। जो वेबसाइट पर जनरेट हो जायेगा।
 बताते चले कि काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव में प्रस्तावित विधाओ में "गायन" अंतर्गत शास्त्रीय गायन में ख्याल और ध्रुपद, उपशास्त्रीय गायन में ठुमरी, दादरा, चैती, झूला, होरी, टप्पा, लोक गायन में कजरी, चैती, होरी, झूला, बिरहा, हिमालयी लोकगीत सहित अन्य प्रकार व सुगम संगीत में गीत, ग़ज़ल, भजन, देशभक्ति गीत आदि हैं। "वादन" में स्वर वाद्य अंतर्गत सितार, वायलिन, बांसुरी, शहनाई, गिटार, सारंगी, हारमोनियम, ताल वाद्य में तबला, पखावज, मृदंगम, घटम्, लोक वाद्य में दफ़ला, नगाड़ा, दुक्कड़, ढोल, ढोलक, नाल, ताशा तथा "नृत्य" में शास्त्रीय नृत्य अंतर्गत कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, लोकनृत्य में प्रचलित स्थानीय और हिमालयी लोकनृत्य व जनजातीय नृत्य में वाराणसी और आस-पास के जनजातीय नृत्य प्रमुख है। कार्यक्रम के तहत प्रथम चरण में 16 से 27 अगस्त तक न्याय पंचायत स्तर पर होने वाले कार्यक्रम के लिए अधिक से अधिक प्रतिभागियों को चिन्हित किए जाने का निर्देश दिया। "काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव" के अंतर्गत प्रथम चरण में 16 से 27 अगस्त तक  न्याय पंचायत स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिसमें 16 से 18 अगस्त तक अराजीलाइन व बड़ागांव, 19 से 21 अगस्त तक चिरईगांव व चोलापुर, 22 से 24 अगस्त तक हरहुआ व काशीविद्यापीठ तथा 25 से 27 अगस्त पिण्डरा व सेवापुरी विकास खंड  के न्याय पंचायतो में गायन, वादन व नृत्य विद्या में कार्यक्रम होंगे। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में 28 अगस्त से 11 सितंबर तक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में विकासखंड एवं जोन स्तर पर गायन, वादन एवं नृत्य के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसके तहत 28 से 30 अगस्त तक विकासखंड अराजीलाइन एवं बड़ागांव तथा शहरी क्षेत्र में वरुणापार एवं आदमपुर जोन, 1 से 3 सितंबर तक विकासखंड चिरईगांव एवं चोलापुर तथा शहरी क्षेत्र में कोतवाली जोन, 3 से 6 सितंबर तक विकास खंड हरहुआ एवं काशीविद्यापीठ तथा शहरी क्षेत्र में दशाश्वमेध जोन एवं 8 से 11 सितंबर तक विकासखंड पिण्डरा एवं सेवापुरी तथा शहरी क्षेत्र के भेलूपुर जोन में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तृतीय चरण में 14 से 16 सितंबर तक कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिसके अंतर्गत 14 सितम्बर को गायन, 15 सितंबर को वादन तथा 16 सितंबर को नृत्य के कार्यक्रम काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन हॉल में आयोजित होंगे। कार्यक्रम के अंतिम चरण में विशिष्ट प्रस्तुतियां 18 सितंबर को होगी। जिसमे प्रतियोगिता के विजेताओं एवं वाराणसी के ख्यातिलब्ध कलाकारों की प्रस्तुतियां होगी।

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