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वाराणसी

पीछे हटा वक्फ बोर्ड, 2021 में ही निरस्त हो चुकी थी नोटिस

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नाराज छात्रों ने फूंका पुतला

वाराणसी। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने हाल ही में यूपी कॉलेज की संपत्ति को लेकर जारी किया गया नोटिस 2021 में ही निरस्त करने की जानकारी दी। बोर्ड के अधिकारियों ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि उक्त नोटिस को 18 जनवरी 2021 को वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के आदेश पर निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद कुछ अफवाहों के चलते इस मुद्दे पर फिर से विवाद उठ खड़ा हुआ है।

कुछ दिन पहले वक्फ बोर्ड द्वारा उदय प्रताप कॉलेज की संपत्ति पर दावा किए जाने के विरोध में यूपी कॉलेज के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों ने हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश की और अब महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताई। छात्रों ने वक्फ बोर्ड का पुतला दहन किया और इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई।यूपी कॉलेज में स्थित मजार पर वक्फ बोर्ड का दावा वापस लेने के बाद कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. डीके सिंह ने सभी छात्रों से सौहार्द बनाए रखने की अपील की। छात्र नेता शिवम तिवारी ने कहा कि वे यूपी कॉलेज के छात्रों के साथ खड़े हैं और सरकार से मांग की है कि वक्फ बोर्ड पर जल्द से जल्द बैन लगाया जाए। छात्रसंघ अध्यक्ष प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कहा कि यूपी कॉलेज का स्थापना 1909 में हुआ था, जबकि वक्फ बोर्ड का गठन 1954 में हुआ। ऐसे में कॉलेज की संपत्ति पर बोर्ड का दावा कैसे हो सकता है।

ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड ने 2021 में जारी नोटिस को निरस्त कर दिया था और अब इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें और शांतिपूर्ण तरीके से स्थिति को समझें।

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